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वाराणसी: कफ सिरप तस्क­री के सरगना शुभम जायसवाल के परिवार पर कानून का शिकंजा, 38 करोड़ की संपत्ति का मांगा हिसाब

 VARANASI (UTTAR PRADESH):

अंतरराज्यीय कफ सिरप तस्करी मामले में फरार चल रहे 75 हजार रुपये के इनामी माफिया शुभम जायसवाल पर कानून का शिकंजा अब और कस गया है। वाराणसी की अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत के आदेश पर आज, 2 जनवरी को शुभम के परिवार के सदस्यों की पेशी निर्धारित की गई है। कोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए शुभम की मां, पत्नी और बहन को तलब किया है और उनसे करीब 38 करोड़ रुपये की संपत्ति के वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।

कफ सिरप कांड फोटो :- up prime news









मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया है कि शुभम जायसवाल ने तस्करी के जरिए अर्जित काले धन को अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर संपत्तियों में निवेश किया है। जांच एजेंसियों को फर्जी फर्मों, संदिग्ध बैंक खातों और बड़े पैमाने पर हवाला ट्रांजैक्शन के सबूत मिले हैं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि परिवार को यह साबित करना होगा कि करोड़ों की यह संपत्ति किस आय स्रोत से खरीदी गई है। यदि वे वैध दस्तावेज पेश करने में विफल रहते हैं, तो इन संपत्तियों पर बड़ी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इस हाई-प्रोफाइल मामले में शुभम जायसवाल अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है और भूमिगत है। उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस भी जारी किया जा चुका है। वहीं, शुभम के पिता भोला प्रसाद को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है और वह फिलहाल सोनभद्र जेल में बंद हैं। एसआईटी की जांच में सामने आया है कि यह सिंडिकेट केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं था, बल्कि इसकी जड़ें बिहार और पश्चिम बंगाल के रास्ते बांग्लादेश तक फैली हुई हैं।

खबर का बैकग्राउंड:
यह मामला कोडीन युक्त कफ सिरप की अवैध तस्करी से जुड़ा है, जिसका इस्तेमाल नशे के लिए किया जाता है। जांच में अब तक 89 लाख से अधिक बोतलों की अवैध खरीद-फरोख्त का पता चला है। यह नेटवर्क वाराणसी से शुरू होकर अंतरराष्ट्रीय सीमा तक फैला हुआ था, जिसे शुभम जायसवाल अपने गुर्गों के जरिए संचालित कर रहा था।


पब्लिक इम्पैक्ट:
नशे के इस बड़े कारोबार पर हो रही कार्रवाई से समाज में ड्रग्स की आपूर्ति पर रोक लगेगी, जिससे युवा पीढ़ी को नशे की लत से बचाने में मदद मिलेगी। साथ ही, यह कार्रवाई उन अपराधियों के लिए एक कड़ा संदेश है जो अवैध कमाई को अपने परिवार के नाम पर छिपाकर कानूनी कार्रवाई से बचने की कोशिश करते हैं।


UP Prime News एनालिसिस:
एसआईटी द्वारा परिवार की संपत्तियों की जांच और कोर्ट द्वारा दस्तावेज तलब करना यह दर्शाता है कि एजेंसियां अब केवल अपराधियों को पकड़ने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनकी आर्थिक कमर तोड़ने पर फोकस कर रही हैं। यह 'फाइनेंशियल ट्रेल' (वित्तीय लेन-देन) की जांच ही इस पूरे सिंडिकेट को ध्वस्त करने में सबसे अहम भूमिका निभाएगी।

VARANASI | UP Prime News
Published: 02 January 2026 | 03:41 PM IST
By UP Prime News Desk


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