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अरावली की कृत्रिम झीलें बनीं 'डेथ ट्रैप': 110 से अधिक मौतों के बाद भी प्रशासन और जनता बेपरवाह

 लखनऊ / हरियाणा (फरीदाबाद):

दिल्ली से सटे हरियाणा के फरीदाबाद और आसपास के अरावली पर्वतमाला क्षेत्र में अवैध और वैध खनन के कारण बनीं कृत्रिम झीलें आज युवाओं के लिए 'काल' साबित हो रही हैं। पिछले कुछ वर्षों में इन झीलों में डूबने से 110 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद न तो प्रशासन पूरी तरह जाग रहा है और न ही लोग अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर नजर आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर 'रील्स' बनाने और रोमांच की चाह में युवा इन प्रतिबंधित क्षेत्रों में अपनी जान जोखिम में डालकर पहुंच रहे हैं।

अरावली पर्वतमाला झील फोटो : UP prime news







अरावली की पहाड़ियों के बीच स्थित ये झीलें देखने में बेहद आकर्षक और शांत लगती हैं, लेकिन इनकी गहराई और बनावट किसी खौफनाक जाल से कम नहीं है। खनन के कारण बने गहरे गड्ढों में बारिश और भूजल जमा होने से ये झीलें अस्तित्व में आईं। इनका पानी साफ और नीला होने के कारण लोग भ्रमित हो जाते हैं और इसकी गहराई का सही अंदाजा नहीं लगा पाते। धरातल पर पथरीली सतह और काई जमी होने के कारण पैर फिसलते ही व्यक्ति सीधे गहरे पानी में समा जाता है, जहां से निकलना लगभग नामुमकिन होता है।

प्रशासनिक स्तर पर इन स्थानों को 'नो एंट्री जोन' घोषित किया गया है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। कई स्थानों पर न तो कोई मजबूत तारबंदी की गई है और न ही स्थाई पुलिस बल या सुरक्षा गार्ड तैनात किए गए हैं। केवल मौखिक आदेशों और कुछ कागजी चेतावनियों के सहारे इतनी संवेदनशील जगहों को खुला छोड़ दिया गया है। पर्यटन और एडवेंचर के नाम पर युवा इन खतरनाक रास्तों से होकर झीलों तक पहुंच जाते हैं, जिसके कारण हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है।

खबर का बैकग्राउंड:

अरावली क्षेत्र में साल 2002 से पहले बड़े पैमाने पर पत्थर का खनन होता था। पर्यावरण संरक्षण को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 2002 में खनन गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगा दी थी। खनन बंद होने के बाद छोड़े गए गहरे गड्ढे धीरे-धीरे बारिश के पानी और प्राकृतिक जल स्रोतों से भर गए, जिससे इन कृत्रिम झीलों का निर्माण हुआ। समय के साथ ये झीलें पिकनिक स्पॉट बन गईं, लेकिन सुरक्षा मानकों के अभाव में ये अब 'डेथ ट्रैप' (मौत का जाल) बन चुकी हैं।

पब्लिक इम्पैक्ट:

इन हादसों का सबसे बड़ा असर आम जनता और विशेषकर उन परिवारों पर पड़ रहा है जिन्होंने अपने जवान बेटों को खोया है। जनता में प्रशासन की कार्यशैली को लेकर भारी रोष है, क्योंकि बार-बार होने वाले हादसों के बावजूद सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए हैं। वहीं, झीलों के पास सुरक्षा की कमी के कारण आसपास रहने वाले ग्रामीण और पशुपालक भी हमेशा खतरे के साये में रहते हैं। यह मुद्दा सीधे तौर पर जन सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा है।

UP Prime News एनालिसिस:

अरावली की झीलों में बढ़ती मौतें केवल प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा नहीं हैं, बल्कि यह सामाजिक जागरूकता की कमी और युवाओं में बढ़ते 'सोशल मीडिया फेम' के जुनून को भी दर्शाती हैं। जब तक सख्त कानून के साथ-साथ जन-भागीदारी सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक इन हादसों पर लगाम लगाना चुनौतीपूर्ण बना रहेगा।

लखनऊ / हरियाणा | UP Prime News

Published: February 26, 2026 | 01:03 PM IST

By UP Prime News Desk







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