मेरठ: पत्नी के विवाद में युवक की सरेराह हत्या, आरोपी ने सोशल मीडिया पर वीडियो डालकर पुलिस को दी चुनौती
मेरठ उत्तर प्रदेश :
उत्तर प्रदेश के मेरठ जनपद के बहसूमा थाना क्षेत्र से एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है, जहां आपसी रंजिश और पारिवारिक विवाद के चलते एक युवक की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई। मृतक की पहचान सुनील के रूप में हुई है। इस सनसनीखेज वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी प्रदीप धीमान मौके से फरार हो गया, लेकिन भागते समय उसने सोशल मीडिया पर एक चार मिनट का वीडियो साझा किया है। इस वीडियो में आरोपी न केवल अपना गुनाह कबूल कर रहा है, बल्कि वह पुलिस और प्रशासन को खुलेआम चुनौती देता हुआ भी नजर आ रहा है। आरोपी ने वीडियो में स्पष्ट तौर पर कहा है कि उसे 'मौत की परवाह नहीं है' और जो भी उसे दुख देगा, उसका यही अंजाम होगा।
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| आरोपी प्रदीप धीमान फोटो : UP prime news |
वारदात मेरठ के बहसूमा थाना अंतर्गत रामराज इलाके की है। जानकारी के मुताबिक, आरोपी प्रदीप धीमान का विवाद पिछले काफी समय से सुनील के साथ चल रहा था। बताया जा रहा है कि प्रदीप की पत्नी करीब डेढ़ साल पहले उसे और उसकी दो मासूम बेटियों (जिनकी उम्र पांच और तीन वर्ष है) को छोड़कर सुनील के साथ रहने चली गई थी। प्रदीप ने वीडियो में आरोप लगाया कि उसने इस मामले में पुलिस प्रशासन से मदद की गुहार लगाई थी, लेकिन जब उसे न्याय नहीं मिला, तो उसने खुद ही कानून हाथ में लेने का फैसला किया। वारदात के दौरान प्रदीप ने सुनील पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाईं, जिससे सुनील की मौके पर ही मौत हो गई। आरोपी ने दावा किया है कि उसने हत्या में 12, 32 और 315 बोर की गोलियों का इस्तेमाल किया है।
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| मृतक सुनील फोटो : UP prime news |
हत्याकांड को अंजाम देने के बाद आरोपी प्रदीप ने अपनी बाइक पर भागते हुए मोबाइल से वीडियो बनाया। इस वीडियो में वह काफी उत्तेजित और आक्रोशित दिख रहा है। उसने वीडियो में बहसूमा और फलावदा थाना प्रभारियों के साथ-साथ मेरठ के एसएसपी को भी संबोधित किया है। आरोपी ने विशेष रूप से एसओ ए.के. शर्मा और दरोगा अनिल कुमार का नाम लेते हुए उन पर लापरवाही बरतने के आरोप लगाए और उन्हें भी जान से मारने की धमकी दी। उसने सोशल मीडिया पर अपनी इंस्टाग्राम आईडी 'मौत का खौफ 302' का भी जिक्र किया है। आरोपी का कहना है कि प्रशासन ने यदि 'धोखा देने वाली औरतों' के खिलाफ कदम नहीं उठाया, तो ऐसी घटनाएं होती रहेंगी।
इस घटना के बाद इलाके में भारी तनाव फैल गया है। मृतक सुनील के परिजनों और ग्रामीणों ने पुलिस पर घोर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। सुनील के चाचा सुजीत ने बताया कि प्रदीप ने करीब छह महीने पहले भी उनके घर पर फायरिंग की थी। उस समय ग्रामीणों ने उसे पकड़ने की कोशिश की थी और वह अपना तमंचा मौके पर ही छोड़कर भाग गया था। वह तमंचा पुलिस को सौंपा गया था, लेकिन पुलिस ने तब प्रदीप के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। परिजनों का कहना है कि अगर पुलिस समय रहते सख्त कदम उठाती, तो आज सुनील जिंदा होता। ग्रामीणों ने शव को सड़क पर रखकर जाम लगाने की कोशिश की, जिसे बाद में पुलिस के आला अधिकारियों द्वारा निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई के आश्वासन के बाद शांत कराया गया।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी प्रदीप धीमान की शादी साल 2017 में सैफ़पुर कर्मचंदपुर की रहने वाली पूनम से हुई थी। करीब डेढ़ साल पहले पूनम, सुनील के साथ रहने चली गई थी। पूनम ने बाद में हस्तिनापुर थाने में अपने पति प्रदीप के साथ वापस जाने से इनकार कर दिया था और सुनील के साथ ही रहने की इच्छा जताई थी। इसी बात को लेकर प्रदीप के मन में गहरी रंजिश पैदा हो गई थी। फिलहाल पुलिस ने आरोपी की पत्नी पूनम को सुरक्षा घेरे में ले लिया है और आरोपी प्रदीप की तलाश में कई टीमें गठित कर दी गई हैं। बताया जा रहा है कि आरोपी ने भागते समय शराब पी थी और वह रामराज के जंगलों की ओर गया है।
खबर का बैकग्राउंड:
यह पूरा मामला एक गंभीर घरेलू कलह और अवैध संबंधों की रंजिश का परिणाम है। साल 2017 में हुई शादी के बाद प्रदीप और पूनम की दो बेटियां थीं, लेकिन डेढ़ साल पहले पूनम ने सुनील के साथ रहने का फैसला किया। इस अलगाव ने प्रदीप को हिंसक बना दिया। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, छह महीने पहले भी आरोपी ने जानलेवा हमला किया था, जिसे स्थानीय स्तर पर पुलिस ने गंभीरता से नहीं लिया, जिससे उसका हौसला बढ़ गया।
पब्लिक इम्पैक्ट:
दिनदहाड़े हुई इस हत्या और उसके बाद हत्यारे द्वारा सोशल मीडिया पर वीडियो डालकर प्रशासन को दी गई चुनौती ने आम जनता में असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है। सरेराह ऐसी वारदातों से अपराधियों के मन में कानून का डर खत्म होता दिखाई दे रहा है। वहीं, सोशल मीडिया का इस तरह से अपराध के महिमामंडन के लिए इस्तेमाल होना समाज के लिए एक चिंताजनक संकेत है।
UP Prime News एनालिसिस:
यह घटना पुलिस की खुफिया तंत्र और प्रिवेंटिव एक्शन की विफलता को दर्शाती है। यदि छह महीने पहले हुई फायरिंग पर कड़ी कार्रवाई होती, तो आज एक व्यक्ति की जान बचाई जा सकती थी। साथ ही, यह मामला डिजिटल युग में अपराधियों द्वारा सोशल मीडिया को हथियार बनाकर सनसनी फैलाने की प्रवृत्ति पर कड़े अंकुश की मांग करता है।
मेरठ | UP Prime News
Published: Thu, 26 Feb 2026 | 02:02 PM IST
By UP Prime News Desk


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