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फर्रुखाबाद: स्कूल में पेट के कीड़े की दवा खाते ही 111 बच्चों की बिगड़ी तबीयत, अस्पताल में कराए गए भर्ती

 उत्तर प्रदेश (फर्रुखाबाद):

उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां जहानगंज क्षेत्र के एक स्कूल में पेट के कीड़े मारने की दवा (एल्बेंडाजोल) खाने से करीब 111 बच्चों की तबीयत अचानक बिगड़ गई। मामला मोईनुद्दीनपुर राठौरा गांव के जवाहरलाल प्रेमादेवी जूनियर हाईस्कूल का है। मंगलवार दोपहर को स्कूल में जब बच्चों को दवा दी गई, उसके कुछ ही देर बाद एक-एक कर बच्चों को चक्कर आने लगे और कई छात्र बेहोश होकर गिरने लगे। इस घटना से स्कूल परिसर और गांव में हड़कंप मच गया।

स्कूल के बच्चों की कीड़े वाली दवा से तबीयत खराब होने की खबर
बच्चो का सांकेतिक फोटो : up prime news












प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्कूल के प्रधानाध्यापक फूल सिंह दोपहर करीब 12:30 बजे सीएचसी कमालगंज से दवा लेकर आए थे और उन्होंने अन्य शिक्षकों के साथ मिलकर कक्षाओं में बच्चों को गोलियां बांट दीं। दवा खाने के महज 15 मिनट के भीतर ही कक्षा 1 के प्रशांत और कक्षा 4 के रितिक व आदित्य जैसे छात्रों की हालत बिगड़ने लगी। धीरे-धीरे 111 से अधिक बच्चों ने जी मिचलाने और उल्टी की शिकायत की। आनन-फानन में एंबुलेंस बुलाई गई और बच्चों को लोहिया अस्पताल व सीएचसी कमालगंज में भर्ती कराया गया।

इस मामले में स्वास्थ्य विभाग और शिक्षा विभाग की लापरवाही भी सामने आ रही है। नियमों के मुताबिक, दवा स्वास्थ्य कर्मियों (ANM) की मौजूदगी में दी जानी चाहिए थी, लेकिन मौके पर एएनएम मौजूद नहीं थीं। वहीं, बच्चों की हालत बिगड़ते देख और ग्रामीणों की भीड़ जुटते ही स्कूल के शिक्षक मौके से खिसक गए। हालांकि, राहत की बात यह है कि सीएमओ डॉ. अवनींद्र कुमार और बीएसए ने पुष्टि की है कि दवा की एक्सपायरी डेट 2028 है और उपचार के बाद सभी बच्चों की स्थिति अब सामान्य है।

खबर का बैकग्राउंड:

उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग द्वारा बच्चों के स्वास्थ्य सुधार के लिए समय-समय पर कृमि मुक्ति अभियान के तहत एल्बेंडाजोल की गोलियां बांटी जाती हैं। फर्रुखाबाद के इस स्कूल में भी इसी अभियान के तहत दवा वितरित की गई थी, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार, खाली पेट दवा लेने या सही प्रोटोकॉल का पालन न करने से कभी-कभी बच्चों में ऐसे लक्षण दिखाई देते हैं।

पब्लिक इम्पैक्ट:

इस घटना के बाद अभिभावकों में सरकारी स्कूलों में दी जाने वाली दवाओं को लेकर डर का माहौल है। यह घटना दर्शाती है कि बिना डॉक्टरी निगरानी या स्वास्थ्य कर्मियों की अनुपस्थिति में दवा बांटना कितना जोखिम भरा हो सकता है। इससे स्वास्थ्य अभियानों के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े होते हैं।

UP Prime News एनालिसिस:

स्कूलों में मेडिकल प्रोटोकॉल की अनदेखी बच्चों की जान जोखिम में डाल सकती है; प्रशासन को दवा वितरण के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों की उपस्थिति अनिवार्य सुनिश्चित करनी चाहिए।

फर्रुखाबाद | UP Prime News

Published: February 11, 2026 | 12:18 PM IST

By UP Prime News Desk









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