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यूपी में अब मिलेंगे हल्के और पारदर्शी कंपोजिट गैस सिलेंडर, लोहे के मुकाबले आधा होगा वजन और बढ़ेगी सुरक्षा

 लखनऊ  उत्तर प्रदेश 

उत्तर प्रदेश के घरेलू रसोई गैस उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी सुविधा की शुरुआत हुई है। प्रदेश में अब लोहे के भारी-भरकम सिलेंडरों की जगह फाइबर से बने कंपोजिट गैस सिलेंडर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इंडियन ऑयल (इंडेन) के बाद अब भारत गैस ने भी प्रदेश के प्रमुख शहरों जैसे लखनऊ, वाराणसी, आगरा, नोएडा और गाजियाबाद में पुराने उपभोक्ताओं के लिए इन सिलेंडरों का वितरण शुरू कर दिया है। ये नए सिलेंडर वजन में काफी हल्के हैं और इनकी बॉडी पारदर्शी (translucent) है, जिससे उपभोक्ता आसानी से देख सकेंगे कि सिलेंडर में कितनी गैस बची है।

यूपी में फाइबर गैस सिलेंडर का वितरण
फाइबर से बने कंपोजिट गैस सिलेंडर  फोटो : up prime news











इन सिलेंडरों की सबसे बड़ी खासियत इनकी सुरक्षा और कम वजन है। सामान्य लोहे का खाली सिलेंडर करीब 15 किलो का होता है, जिसमें 14.5 किलो गैस भरने पर कुल वजन लगभग 30 किलो हो जाता है। इसके विपरीत, फाइबर सिलेंडर में 10 किलो गैस आती है और खाली सिलेंडर का वजन मात्र 5 किलो है, यानी कुल वजन सिर्फ 15 किलो ही रहता है। वजन कम होने की वजह से इसे घर में एक जगह से दूसरी जगह ले जाना और उठाना महिलाओं और बुजुर्गों के लिए काफी आसान होगा। साथ ही, इसके पारदर्शी होने से गैस चोरी की शिकायतों पर भी लगाम लगेगी।

सुरक्षा के लिहाज से भी ये सिलेंडर क्रांतिकारी माने जा रहे हैं। लोहे के सिलेंडरों में आग लगने की स्थिति में ब्लास्ट होने का खतरा रहता है, लेकिन फाइबर बॉडी वाले ये कंपोजिट सिलेंडर आग लगने पर फटते नहीं हैं, बल्कि धीरे-धीरे पिघल कर नष्ट हो जाते हैं, जिससे जान-माल का बड़ा नुकसान होने से बच सकता है। नए कनेक्शन या पुराने सिलेंडर को बदलने के लिए उपभोक्ताओं को अपनी एजेंसी पर पुराना सिलेंडर जमा करना होगा और करीब 300 रुपये का शुल्क देना होगा। खास बात यह है कि इन सिलेंडरों पर पुराने रेगुलेटर ही काम करेंगे।

खबर का बैकग्राउंड:


प्रदेश में एलपीजी के करीब 5.5 करोड़ उपभोक्ता हैं। रसोई गैस वितरण प्रणाली को आधुनिक और सुरक्षित बनाने के लिए तेल कंपनियों ने 'पायलट प्रोजेक्ट' के तहत प्लास्टिक और फाइबर बॉडी वाले सिलेंडरों को बाजार में उतारा है। पहले यह सुविधा केवल कुछ शहरों तक सीमित थी, लेकिन अब इसे व्यापक स्तर पर विस्तार दिया जा रहा है।

पब्लिक इम्पैक्ट:

  1. वजन आधा होने से उपभोक्ताओं को भारी सिलेंडर ढोने से राहत मिलेगी।

  2. गैस का स्तर दिखने की वजह से उपभोक्ता गैस कम मिलने या चोरी जैसी समस्याओं से बच सकेंगे।

  3. रसोई में आग लगने जैसी दुर्घटनाओं के समय बड़े विस्फोट का खतरा कम होगा।

  4. जंग न लगने वाली बॉडी की वजह से रसोई के फर्श पर दाग नहीं पड़ेंगे और किचन मॉडर्न दिखेगा।

UP Prime News एनालिसिस:


फाइबर सिलेंडरों का बढ़ता उपयोग उपभोक्ता सुरक्षा और सुविधा की दिशा में एक सकारात्मक कदम है, जो गैस वितरण प्रणाली में पारदर्शिता और तकनीक के तालमेल को दर्शाता है।


लखनऊ  उत्तर प्रदेश  UP Prime News

Published: 11 February 2026 | 10:34 AM IST
By UP Prime News Desk





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