महाशिवरात्रि 2026: काशी विश्वनाथ धाम में उमड़ा आस्था का सैलाब, सुबह 9 बजे तक 4 लाख भक्तों ने किए बाबा के दर्शन
वाराणसी (उत्तर प्रदेश):
महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर रविवार को धर्म नगरी काशी में आस्था का अभूतपूर्व संगम देखने को मिला। भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह के उत्सव 'महाशिवरात्रि' पर बाबा विश्वनाथ के दरबार में हाजिरी लगाने के लिए देश के कोने-कोने से श्रद्धालुओं का रेला उमड़ पड़ा। रविवार तड़के मंगल आरती के साथ ही दर्शन-पूजन का सिलसिला शुरू हुआ, जो अनवरत जारी है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सुबह 9 बजे तक ही लगभग चार लाख श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त कर चुके थे। मंदिर परिसर और आसपास की गलियां 'हर-हर महादेव' और 'ओम् नमः शिवाय' के जयघोष से गुंजायमान हो उठीं, जिससे पूरा वातावरण शिवमय हो गया।
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| वाराणसी बाबा विश्वनाथ मंदिर महाशिवरात्रि उत्सव फोटो : up prime news |
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे, जिसमें स्थानीय पुलिस के साथ-साथ अर्धसैनिक बलों की भारी तैनाती की गई। पूरे मेला क्षेत्र और मंदिर परिसर की निगरानी सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से कंट्रोल रूम से की जा रही थी। भीड़ प्रबंधन (Crowd Management) के लिए बैरिकेडिंग की गई और श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग प्रवेश एवं निकास मार्ग निर्धारित किए गए ताकि किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। वाराणसी के वरिष्ठ अधिकारी स्वयं मौके पर मौजूद रहकर व्यवस्थाओं का जायजा लेते रहे। मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) विश्व भूषण मिश्र ने बताया कि श्रद्धालुओं की अत्यधिक संख्या को देखते हुए 15 और 16 फरवरी के लिए ऑनलाइन बुकिंग की व्यवस्था को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। उन्होंने भक्तों से धैर्य बनाए रखने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए केवल सुरक्षा ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और नागरिक सुविधाओं का भी विशेष ध्यान रखा गया। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जगह-जगह प्राथमिक उपचार केंद्र (First Aid Centers) स्थापित किए गए ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल सहायता मिल सके। इसके अतिरिक्त, खोया-पाया केंद्र भी सक्रिय रहा, जहां तैनात कर्मचारी लाउडस्पीकर के माध्यम से बिछड़े हुए लोगों को उनके परिजनों से मिलाने का निरंतर प्रयास करते रहे। दूर-दराज के जिलों और अन्य राज्यों से आए श्रद्धालु घंटों लंबी कतारों में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते दिखे। कई भक्त गंगा स्नान के बाद पवित्र गंगाजल, बेलपत्र और विशेष पूजन सामग्री लेकर बाबा का जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करने पहुंचे थे।
खबर का बैकग्राउंड:
काशी विश्वनाथ धाम का पुनरुद्धार होने के बाद से यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है। महाशिवरात्रि काशी का सबसे प्रमुख पर्व माना जाता है, क्योंकि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन भगवान शिव का विवाह हुआ था। हर साल की तरह इस साल भी प्रशासन ने लाखों की भीड़ के आगमन का अनुमान लगाते हुए महीनों पहले से तैयारियां शुरू कर दी थीं। मंदिर प्रशासन का मुख्य उद्देश्य सुगम दर्शन और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना रहा है।
पब्लिक इम्पैक्ट:
इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने से स्थानीय पर्यटन और अर्थव्यवस्था को बड़ा बढ़ावा मिलता है, लेकिन साथ ही शहर की यातायात व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ता है। ऑनलाइन बुकिंग बंद होने से उन लोगों को असुविधा हो सकती है जिन्होंने पहले से योजना बनाई थी, परंतु सुरक्षा की दृष्टि से यह कदम अनिवार्य था। प्रशासन की सक्रियता से भगदड़ जैसी स्थितियों पर नियंत्रण पाना संभव हुआ है, जिससे आम जनता सुरक्षित महसूस कर रही है।
UP Prime News एनालिसिस:
धार्मिक आयोजनों में तकनीक और मानव प्रबंधन का सटीक तालमेल देखने को मिला है। ऑनलाइन सेवाओं का अस्थायी स्थगन भीड़ को नियंत्रित करने का एक प्रशासनिक कौशल है, जो यह दर्शाता है कि प्रशासन के लिए वीआईपी व्यवस्था से ऊपर आम श्रद्धालु की सुरक्षा सर्वोपरि है।
वाराणसी | UP Prime News
Published: February 15, 2026 | 10:04 AM IST
By UP Prime News Desk

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