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लखनऊ KGMU धर्मांतरण मामला: आरोपी डॉक्टर रमीज और परिजनों पर 800 पन्नों की चार्जशीट दाखिल, यौन शोषण और जबरन गर्भपात के भी गंभीर आरोप

 उत्तर प्रदेश (लखनऊ):

राजधानी लखनऊ के प्रतिष्ठित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में एक महिला डॉक्टर के साथ हुए यौन शोषण और जबरन धर्मांतरण के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में पुलिस ने आरोपी डॉक्टर रमीज और उसके माता-पिता के खिलाफ अदालत में 800 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट दाखिल कर दी है। चौक पुलिस स्टेशन की ओर से पेश किए गए इस आरोप पत्र में न केवल यौन शोषण, बल्कि जबरन गर्भपात, ब्लैकमेलिंग और अवैध धर्मांतरण जैसे गंभीर आरोपों को शामिल किया गया है।

केजीएमयू धर्मांतरण और यौन शोषण मामले की पुलिस जांच
डॉक्टर रमीज के खिलाफ दाखिल चार्जशीट फोटो : UP prime news










पुलिस द्वारा दाखिल की गई इस चार्जशीट में दो पीड़िताओं के बयानों को आधार बनाया गया है, साथ ही कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों को भी नत्थी किया गया है। यह मामला तब प्रकाश में आया था जब केजीएमयू की ही एक महिला डॉक्टर ने डॉक्टर रमीज पर शादी का झांसा देकर शारीरिक शोषण करने और बाद में धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डालने का आरोप लगाया था। पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ने अपनी शादीशुदा जिंदगी की सच्चाई छुपाई थी और विरोध करने पर पीड़िता को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियां दी थीं।

आरोप पत्र के अनुसार, पीड़िता ने अपनी शिकायत में बताया था कि डॉक्टर रमीज ने उसे इस्लाम स्वीकार करने के लिए मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। जब महिला डॉक्टर ने शादी का दबाव बनाया, तो रमीज ने शर्त रखी कि उसे पहले अपना धर्म बदलना होगा। इस दौरान पीड़िता गर्भवती भी हो गई थी, लेकिन आरोपी ने कथित तौर पर उसे जबरन मेडिकल अबॉर्शन (गर्भपात) कराने के लिए मजबूर किया। पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया था कि रमीज ने उसके कुछ निजी फोटो और वीडियो बना लिए थे, जिन्हें वायरल करने की धमकी देकर वह लगातार उसका ब्लैक मेल कर रहा था।

इस मामले का एक और गंभीर पहलू केजीएमयू प्रशासन से जुड़ा है। उत्तर प्रदेश सरकार ने यूनिवर्सिटी के कुलपति के ओएसडी (OSD) रहे सैयद अब्बास के खिलाफ भी जांच के आदेश दिए हैं। सैयद अब्बास पर आरोप है कि उन्होंने आरोपी डॉक्टर रमीज को बचाने की कोशिश की और नियमों के विरुद्ध जाकर उसे प्रशासनिक संरक्षण प्रदान किया। साथ ही, नेशनल मेडिकोज ऑर्गनाइजेशन (NMO) ने भी इस नियुक्ति पर सवाल उठाए थे, जिसके बाद विवाद बढ़ता देख प्रशासन ने सैयद अब्बास को चुपचाप पद से हटा दिया था। अब एक विशेष समिति इस बात की जांच कर रही है कि क्या यूनिवर्सिटी परिसर में अन्य धार्मिक गतिविधियां भी संचालित की जा रही थीं।

खबर का बैकग्राउंड:

यह पूरा विवाद दिसंबर 2024 के अंत में तब शुरू हुआ जब केजीएमयू की एक महिला रेजिडेंट डॉक्टर ने मानसिक प्रताड़ना से तंग आकर 17 दिसंबर को नींद की गोलियां खाकर आत्महत्या करने की कोशिश की थी। उसे गंभीर हालत में ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया था, जहां डॉक्टरों ने उसकी जान बचाई। इसके बाद जब पीड़िता के बयान दर्ज हुए, तो डॉक्टर रमीज द्वारा किए जा रहे यौन और धार्मिक उत्पीड़न की रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी सामने आई। पीड़िता ने आरोप लगाया कि रमीज पहले से शादीशुदा था, लेकिन उसने यह बात छिपाकर प्रेम संबंध बनाए और बाद में निकाह के लिए धर्मांतरण का दबाव बनाने लगा।

पब्लिक इम्पैक्ट:

एक प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थान में इस तरह की घटना ने चिकित्सा जगत और आम जनता के बीच सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले के उजागर होने के बाद शैक्षणिक संस्थानों में महिला डॉक्टरों की सुरक्षा और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर बहस छिड़ गई है। धर्मांतरण और यौन शोषण के इन आरोपों ने समाज में विश्वास की कमी पैदा की है, विशेषकर उन स्थानों पर जहां पेशेवर मर्यादा सर्वोपरि होनी चाहिए। प्रशासन द्वारा की जा रही सख्त कार्रवाई से जनता में यह संदेश गया है कि रसूखदार पदों पर बैठे लोग कानून से ऊपर नहीं हैं।

UP Prime News एनालिसिस:

यह मामला व्यक्तिगत अपराध से कहीं अधिक प्रशासनिक विफलता और नैतिक पतन की ओर इशारा करता है। 800 पन्नों की चार्जशीट पुलिस की गंभीरता को दर्शाती है, लेकिन केजीएमयू जैसे संस्थान के भीतर ओएसडी स्तर के अधिकारी पर लगे आरोप संस्थान की साख पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाते हैं। न्याय प्रक्रिया की पारदर्शिता ही भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए एकमात्र उपाय है।

लखनऊ | UP Prime News

Published: February 28, 2026 | 01:35 PM IST

By UP Prime News Desk







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