प्रयागराज: नाबालिग का अपहरण कर जबरन निकाला अंडाणु, फर्जी आधार कार्ड के जरिए रची गई बड़ी साजिश
प्रयागराज उत्तर प्रदेश :
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में मानवता को शर्मसार करने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहाँ एक 15 वर्षीय नाबालिग लड़की का अपहरण कर, फर्जी दस्तावेजों के सहारे एक नामी आईवीएफ (IVF) सेंटर में ले जाकर उसका 'ओवा एक्सट्रैक्शन' (अंडाणु निकलवाना) कराने का आरोप लगा है। इस मामले में कार्रवाई करते हुए प्रयागराज पुलिस ने 4 महिलाओं समेत कुल 5 आरोपियों को हिरासत में लिया है, जिनसे गहन पूछताछ की जा रही है।
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| सांकेतिक फोटो : up prime news |
पुलिस जांच के अनुसार, यह पूरी साजिश नाबालिग को पैसों का लालच देकर और फर्जी पहचान पत्र बनवाकर रची गई थी। पीड़िता की मां ने फाफामऊ थाने में तहरीर दी थी कि आरोपी पलक हेला और उसकी मां रिंकी हेला ने उनकी बेटी को बहला-फुसलाकर अगवा किया। इसके बाद आरोपियों ने नाबालिग को विवाहित और बालिग दिखाने के लिए उसका फर्जी आधार कार्ड तैयार करवाया। इस फर्जीवाड़े में आईवीएफ सेंटर की एक रजिस्टर्ड एजेंट कल्पना भारतीय की भूमिका भी सामने आई है, जिसने कथित तौर पर फर्जी कंसेंट एफिडेविट तैयार करवाया था। 20 जनवरी 2026 को इसी फर्जी दस्तावेज के आधार पर नाबालिग का अंडाणु निकाला गया।
डीसीपी गंगानगर जोन कुलदीप सिंह गुनावत ने बताया कि पीड़िता ने चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) के समक्ष अपना बयान दर्ज कराया है। पीड़िता पूर्व में आरोपी पलक के साथ शादियों में वेट्रेस के रूप में काम करती थी, जहाँ उसे इस अवैध काम के लिए फंसाया गया। पुलिस ने अब तक पलक हेला, रिंकी हेला, सीमा भारतीय, उसके बेटे हिमांशु भारतीय और एजेंट कल्पना भारतीय को हिरासत में लिया है। पुलिस इस गिरोह में शामिल अन्य संभावित सहयोगियों और आईवीएफ सेंटर की कार्यप्रणाली की भी जांच कर रही है।
खबर का बैकग्राउंड:
पीड़िता 15 साल की नाबालिग है जो आर्थिक जरूरतों के कारण शादियों में वेट्रेस का काम करती थी। आरोपियों ने उसकी मजबूरी का फायदा उठाकर अंडाणु तस्करी के रैकेट में उसे झोंक दिया। यह पूरा मामला तब खुला जब पीड़िता की मां ने पुलिस से शिकायत की और लड़की को वन स्टॉप सेंटर भेजा गया।
पब्लिक इम्पैक्ट:
यह घटना चिकित्सा क्षेत्र में सक्रिय माफियाओं और फर्जी दस्तावेज बनाने वाले गिरोहों की भयावहता को दर्शाती है। इससे आम जनता में विशेषकर गरीब परिवारों में असुरक्षा का भाव पैदा होगा। साथ ही, यह मेडिकल सेंटरों में दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया पर भी बड़े सवाल खड़े करता है, जिससे भविष्य में सख्त नियमों की मांग बढ़ेगी।
UP Prime News एनालिसिस:
यह मामला आईवीएफ सेंटरों और एजेंटों के बीच पनप रहे अवैध गठजोड़ की ओर इशारा करता है। फर्जी पहचान पत्रों के जरिए नाबालिगों का शोषण एक गंभीर अपराध है, जिसमें शामिल सफेदपोश चेहरों की पहचान जरूरी है।
प्रयागराज | UP Prime News
Published: 07 फरवरी 2026 09:47 AM IST
By UP Prime News Desk

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