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यूपी में आधार अपडेट के नियमों में बड़ा बदलाव: अब नए प्रमाण पत्र से नहीं बदलेगी जन्मतिथि, UIDAI ने कड़े किए नियम

  लखनऊ उत्तर प्रदेश : 

उत्तर प्रदेश में आधार कार्ड में जन्मतिथि (DOB) बदलवाने वाले नागरिकों के लिए भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब आधार कार्ड में जन्मतिथि को अपडेट कराने के लिए अलग-अलग या नया जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate) मान्य नहीं होगा। यूआईडीएआई के लखनऊ क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति अपनी जन्मतिथि में बदलाव करना चाहता है, तो उसे अपने पुराने जन्म प्रमाण पत्र में ही सुधार करवाना होगा। यानी नए प्रमाण पत्र पर दर्ज नई पंजीकरण संख्या को अब आधार सुधार के लिए स्वीकार नहीं किया जाएगा।

आधार सांकेतिक फोटो : up prime news







आधार कार्ड में होने वाले फर्जीवाड़े और उम्र में हेरफेर को रोकने के लिए विभाग ने यह सख्त कदम उठाया है। क्षेत्रीय कार्यालय के आंकड़ों के मुताबिक, आधार केंद्रों पर आने वाली कुल भीड़ में से लगभग 80 फीसदी लोग केवल अपनी जन्मतिथि में सुधार या बदलाव कराने के लिए आते हैं। इसमें एक बड़ी संख्या उन लोगों की होती है जो सरकारी नौकरी, खेल प्रतियोगिताओं या अन्य लाभों के लिए अपनी वास्तविक उम्र को कम दिखाना चाहते हैं। अब तक लोग पुराना जन्म प्रमाण पत्र निरस्त करवाकर नई पंजीकरण संख्या के साथ नया प्रमाण पत्र बनवा लेते थे, जिसे आधार अपडेट के लिए आधार केंद्रों पर पेश किया जाता था। लेकिन अब सॉफ्टवेयर और नियमों में बदलाव के बाद ऐसी किसी भी कोशिश पर रोक लग जाएगी।

यूआईडीएआई लखनऊ के उप महानिदेशक प्रशांत कुमार सिंह के अनुसार, प्रत्येक जन्म प्रमाण पत्र पर एक विशिष्ट जन्म पंजीकरण संख्या (Registration Number) अंकित होती है। अब नियम यह बनाया गया है कि आधार कार्ड धारक को अपनी जन्मतिथि बदलने के लिए उसी मूल पंजीकरण संख्या वाले प्रमाण पत्र में सुधार करना होगा जो पहले से सिस्टम में दर्ज है। यदि कोई आवेदक बिल्कुल नई पंजीकरण संख्या वाला जन्म प्रमाण पत्र आवेदन के साथ संलग्न करता है, तो सिस्टम उसे स्वीकार नहीं करेगा और आवेदन खारिज कर दिया जाएगा। इसका सीधा अर्थ यह है कि अब जन्मतिथि में मनमाना बदलाव संभव नहीं होगा।

खबर का बैकग्राउंड:

पिछले कुछ वर्षों में आधार कार्ड में उम्र कम कराने के मामलों में अप्रत्याशित वृद्धि देखी गई थी। विशेष रूप से सेना की भर्ती, पुलिस भर्ती और विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए युवा अपनी उम्र कम कराने के लिए दस्तावेजों में हेरफेर करते थे। कई छात्र ऐसे भी पाए गए जो एक से अधिक बार हाईस्कूल की परीक्षा देने के लिए आधार में अपनी जन्मतिथि बदलवाते थे। इस समस्या की गंभीरता को देखते हुए यूआईडीएआई ने पहले ही नियम बनाया था कि कोई भी व्यक्ति अपने जीवनकाल में केवल एक बार ही खुद से जन्मतिथि बदलवा सकता है। दूसरी बार बदलाव के लिए क्षेत्रीय कार्यालय (Regional Office) जाना अनिवार्य था, लेकिन अब प्रमाण पत्र की पंजीकरण संख्या को अनिवार्य कर इस प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और सख्त बना दिया गया है।

पब्लिक इम्पैक्ट:

इस नए नियम का सबसे बड़ा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो गलत तरीके से अपनी उम्र कम या ज्यादा दिखाना चाहते थे। अब जालसाजी के जरिए उम्र बदलना लगभग असंभव हो जाएगा। हालांकि, उन आम नागरिकों को थोड़ी परेशानी हो सकती है जिनके मूल जन्म प्रमाण पत्र में वास्तव में कोई लिपिकीय त्रुटि (Clerical Error) है। उन्हें अब सीधे नया प्रमाण पत्र बनवाने के बजाय संबंधित विभाग (नगर निगम या सांख्यिकी विभाग) से पुराने प्रमाण पत्र में ही सुधार करवाना होगा। इससे सरकारी नौकरियों और खेल जगत में पारदर्शिता बढ़ेगी और वास्तविक हकदारों को उनका अधिकार मिल सकेगा।

UP Prime News एनालिसिस:

यह कदम डिजिटल पहचान की सुरक्षा और सत्यता बनाए रखने के लिए आवश्यक है। जन्म पंजीकरण संख्या को आधार से सख्ती से जोड़ना भ्रष्टाचार और दस्तावेजी धोखाधड़ी को रोकने की दिशा में एक प्रभावी निर्णय साबित होगा।

लखनऊ | UP Prime News

Published: 14 Feb 2026 | 12:03 PM IST

By UP Prime News Desk




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