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महाशिवरात्रि 2026: काशी में शिव विवाह की रस्में शुरू, बाबा विश्वनाथ को चढ़ेगी विशेष 'शगुन की हल्दी'; जानें पूरा कार्यक्रम

 वाराणसी (उत्तर प्रदेश):

धर्म और आध्यात्म की नगरी काशी में महाशिवरात्रि का पर्व अत्यंत हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस वर्ष भी महाशिवरात्रि से पूर्व होने वाली भगवान शिव के विवाह की औपचारिक रस्मों की शुरुआत शुक्रवार, 13 फरवरी 2026 से होने जा रही है। काशी की प्राचीन लोक परंपरा के अनुसार, बाबा विश्वनाथ के विवाह उत्सव का शुभारंभ 'शगुन की हल्दी' की रस्म के साथ होगा। शुक्रवार को बाबा विश्वनाथ के भाल पर शगुन की हल्दी सजाई जाएगी और इसके साथ ही भव्य शोभा यात्रा भी निकाली जाएगी।

सारंगनाथ मंदिर वाराणसी महाशिवरात्रि उत्सव
सारंगनाथ मंदिर वाराणसी महाशिवरात्रि उत्सव








इस विशेष आयोजन के विवरण के अनुसार, बांसफाटक स्थित शिव प्रसाद पांडेय लिंगिया महाराज के आवास 'श्रीयंत्र पीठम' से गाजे-बाजे के साथ हल्दी की पारंपरिक यात्रा शुरू होगी। यह यात्रा टेढ़ीनीम स्थित पूर्व महंत के आवास के लिए प्रस्थान करेगी। वहां पहुंचकर बाबा की पंचबदन चल प्रतिमा पर विधिवत हल्दी अर्पित की जाएगी। इस परंपरा की खास बात यह है कि इस बार बाबा विश्वनाथ के लिए विशेष हल्दी महाराष्ट्र के नासिक से मंगवाई गई है। सिद्धपीठ बड़ी शीतला माता मंदिर के महंत परिवार की ओर से इस विशेष हल्दी का प्रबंध किया गया है। शीतला मंदिर के उपमहंत अवशेष पांडेय (कल्लू महाराज) ने बताया कि काशी की पुरातन परंपराओं का निर्वहन करते हुए इस बार आयोजन को और भी भव्य बनाया गया है।

शुक्रवार की शाम को होने वाले इस मुख्य अनुष्ठान में बाबा विश्वनाथ को दूल्हे के रूप में तैयार किया जाएगा। आयोजन के आयोजक वाचस्पति तिवारी के अनुसार, हल्दी चढ़ाने से पूर्व महंत परिवार की वरिष्ठ सदस्य मोहिनी देवी के सानिध्य में पूजन संपन्न होगा। पंडित सुशील त्रिपाठी के आचार्यत्व में 11 वैदिक ब्राह्मण बाबा विश्वनाथ की पंचबदन प्रतिमा का षोडशोपचार पूजन और अर्चन करेंगे। इसके बाद वैदिक मंत्रोच्चार के बीच बाबा का अलौकिक श्रृंगार होगा, जिससे भक्तों को उनके 'दूल्हा स्वरूप' के दर्शन प्राप्त होंगे। इस अवसर पर काशीवासियों के साथ-साथ बाबा के ससुराल पक्ष यानी सारंगनाथ और त्र्यंबकेश्वर के भक्त भी हल्दी लेकर पहुंचेंगे।

धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी धूम रहेगी। 'शिवांजलि' के संयोजक संजीव रत्न मिश्र ने बताया कि भजन संध्या में पागल बाबा के मधुर भजनों के साथ अदिति शर्मा और सिद्धि कौस्तुभ द्वारा नृत्यांजलि प्रस्तुत की जाएगी। इससे पूर्व, सारंगनाथ मंदिर (जो बाबा का ससुराल माना जाता है) से भी एक शोभा यात्रा निकाली जाएगी। सारंगनाथ सामूहिक रुद्राभिषेक पीठ के अध्यक्ष राहुल सिन्हा और मंत्री टिप्पू पांडेय ने जानकारी दी कि शुक्रवार शाम चार बजे मंदिर में पूजन के बाद माता गौरा के गण (तिलहरू) के रूप में भक्त तिलकोत्सव के लिए निकलेंगे। 14 फरवरी को सारंगनाथ मंदिर में मेहंदी की रस्म और संगीत संध्या का आयोजन होगा, जिसके बाद महाशिवरात्रि के दिन मुख्य पूजन और विशाल भंडारे के साथ उत्सव का समापन होगा।

खबर का बैकग्राउंड:

काशी में महाशिवरात्रि केवल एक पर्व नहीं, बल्कि भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का एक जीवंत उत्सव है। यहां बाबा विश्वनाथ को नगर का राजा और दामाद दोनों स्वरूपों में पूजा जाता है। विवाह की रस्में कई दिन पहले हल्दी, तिलक और मेहंदी के साथ शुरू होती हैं, जिसमें शहर के विभिन्न मोहल्लों और मंदिरों की सहभागिता होती है। सारंगनाथ मंदिर को माता पार्वती का मायका माना जाता है, जहाँ से तिलक की सामग्री आती है।

पब्लिक इम्पैक्ट:

इस आयोजन से वाराणसी के स्थानीय निवासियों और बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं में भारी उत्साह है। टेढ़ीनीम और बांसफाटक जैसे इलाकों में भीड़ बढ़ने के कारण यातायात व्यवस्था में बदलाव देखने को मिल सकते हैं। इसके साथ ही, इन पारंपरिक आयोजनों से स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन को बढ़ावा मिलता है। श्रद्धालु बाबा के 'दूल्हा स्वरूप' के दर्शन कर स्वयं को धन्य मानते हैं, जिससे शहर में भक्तिमय वातावरण बना रहता है।

UP Prime News एनालिसिस:

यह आयोजन काशी की उस अटूट परंपरा को दर्शाता है जो सदियों से अपनी मौलिकता बनाए हुए है। धार्मिक अनुष्ठानों में आधुनिक प्रबंधन और प्राचीन पद्धतियों का मेल सामाजिक एकता को सुदृढ़ करता है।

वाराणसी | UP Prime News

Published: Friday, Feb 13, 2026 | 09:54 AM IST

By UP Prime News Desk













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