कानपुर (उत्तर प्रदेश):
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UP Board) की इंटरमीडिएट की परीक्षाओं के दौरान कानपुर में प्रशासनिक लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां एक परीक्षा केंद्र पर विज्ञान और कला वर्ग की छात्राओं के प्रश्नपत्र आपस में बदल दिए गए, जिससे न केवल छात्राओं का भविष्य दांव पर लग गया है, बल्कि शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यह घटना नजीराबाद थाना क्षेत्र के गुरुनानक गर्ल्स इंटर कॉलेज केंद्र की है, जहां बुधवार को हुई हिंदी की परीक्षा के दौरान यह बड़ी चूक हुई।
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| धरने पर बैठी छात्राएं फोटो :- UP prime news |
मिली जानकारी के अनुसार, 18 फरवरी से शुरू हुई यूपी बोर्ड की परीक्षाओं के पहले दिन इंटरमीडिएट के विद्यार्थियों के लिए हिंदी और सामान्य हिंदी की परीक्षा आयोजित की गई थी। नियमों के अनुसार, विज्ञान वर्ग (Science Stream) की छात्राओं को 'सामान्य हिंदी' और कला वर्ग (Arts Stream) की छत्रओं को 'हिंदी' (साहित्यिक हिंदी) का प्रश्नपत्र दिया जाना चाहिए था। लेकिन गुरुनानक गर्ल्स इंटर कॉलेज केंद्र पर ड्यूटी पर तैनात शिक्षकों ने विज्ञान वर्ग की छात्राओं को सामान्य हिंदी के स्थान पर साहित्यिक हिंदी और कला वर्ग की छात्राओं को हिंदी के स्थान पर सामान्य हिंदी का प्रश्नपत्र वितरित कर दिया।
हैरानी की बात यह रही कि परीक्षा के दौरान न तो छात्राओं ने इस पर कोई आपत्ति जताई और न ही कक्ष निरीक्षकों ने इस त्रटि को पकड़ा। छात्राओं ने गलत प्रश्नपत्र मिलने के बावजूद उसे हल किया और उत्तर पुस्तिकाएं जमा कर दीं। इस मामले का खुलासा तब हुआ जब छात्राएं परीक्षा देकर घर पहुंचीं और अपने शिक्षकों व अभिभावकों के साथ चर्चा की। इसके बाद गुरुवार को बड़ी संख्या में अभिभावक और छात्राएं केंद्र पर पहुंचे और अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए जमकर हंगामा किया।
अभिभावकों का आरोप है कि परीक्षा के दौरान जब छात्राओं ने कुछ पूछने का प्रयास किया, तो उन्हें दबाव बनाकर चुप करा दिया गया और जबरन गलत पेपर हल कराया गया। हंगामे की सूचना मिलते ही नजीराबाद थाने की पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। साथ ही, जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) की टीम ने भी केंद्र का दौरा कर छात्राओं और उनके परिजनों को शांत कराया।
प्रशासनिक जांच में यह बात सामने आई है कि परीक्षा केंद्र पर तैनात कक्ष निरीक्षक 'बेसिक शिक्षा विभाग' (प्राथमिक शिक्षक) से संबंधित थे। उन्हें बोर्ड स्तर पर हिंदी और सामान्य हिंदी के बीच के तकनीकी अंतर की सही जानकारी नहीं थी, जिसके कारण यह अनजाने में यह बड़ी गलती हुई। माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि यह एक गंभीर मानवीय भूल है और इसके लिए जिम्मेदार शिक्षकों पर कार्रवाई की जा सकती है।
कानपुर के जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) डॉ. संतोष कुमार राय ने इस संबंध में स्पष्ट किया है कि बोर्ड को पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट भेज दी गई है। उन्होंने छात्राओं और अभिभावकों को आश्वासन देते हुए कहा कि मूल्यांकन के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखा जाएगा कि किसी भी छात्रा का शैक्षणिक अहित न हो। बोर्ड की ओर से प्राप्त दिशा-निर्देशों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। फिलहाल, भविष्य में ऐसी गलतियां न हों, इसके लिए केंद्र व्यवस्थापकों को कड़े निर्देश जारी किए गए हैं।
खबर का बैकग्राउंड:
उत्तर प्रदेश बोर्ड की परीक्षाएं 18 फरवरी 2026 से शुरू हुई हैं। इंटरमीडिएट की परीक्षा में स्ट्रीम के आधार पर हिंदी के दो अलग-अलग पाठ्यक्रम (सामान्य हिंदी और साहित्यिक हिंदी) होते हैं। गुरुनानक गर्ल्स इंटर कॉलेज और जेएनपीएन इंटर कॉलेज की कुल 8 छात्राओं के साथ यह वाकया हुआ, जहां बेसिक शिक्षा के शिक्षकों द्वारा गलत पेपर बांटे जाने के कारण असमंजस की स्थिति पैदा हुई।
पब्लिक इम्पैक्ट:
इस घटना ने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं। बोर्ड परीक्षाओं में इस तरह की लापरवाही से न केवल विद्यार्थियों में मानसिक तनाव बढ़ता है, बल्कि उनके रिजल्ट और करियर पर भी असर पड़ने का डर रहता है। अभिभावकों में इस बात को लेकर गहरा असंतोष है कि क्या मूल्यांकन केंद्र पर उनकी मेहनत का सही आकलन हो पाएगा।
UP Prime News एनालिसिस:
यह घटना परीक्षा ड्यूटी में तैनात शिक्षकों के उचित प्रशिक्षण की कमी और केंद्र स्तर पर निगरानी तंत्र की विफलता को दर्शाती है। शिक्षा विभाग को भविष्य में विषय विशेषज्ञों को ही कक्ष निरीक्षक के तौर पर प्राथमिकता देनी चाहिए ताकि ऐसी गंभीर त्रुटियों से बचा जा सके।
कानपुर (उत्तर प्रदेश) | UP Prime News
Published: February 19, 2026 | 09:15 PM IST
By UP Prime News Desk
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