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रोहित शेट्टी फायरिंग केस: आगरा के पांच युवाओं की गिरफ्तारी पर उठे सवाल, क्या बेगुनाह फंसे जांच के जाल में?

 उत्तर प्रदेश (आगरा):

फिल्म इंडस्ट्री के मशहूर निर्देशक रोहित शेट्टी के मुंबई स्थित आवास पर हुई फायरिंग की घटना ने अब उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में एक नई बहस और हलचल पैदा कर दी है। मुंबई क्राइम ब्रांच और हरियाणा एसटीएफ की संयुक्त कार्रवाई में आगरा के बाह क्षेत्र स्थित बिजौली गांव के पांच युवकों को गिरफ्तार किया गया है। इन युवाओं पर लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नेटवर्क से जुड़े होने और इस सनसनीखेज वारदात में शामिल होने का गंभीर आरोप है। हालांकि, जैसे-जैसे इस मामले की परतें खुल रही हैं, स्थानीय स्तर पर पुलिसिया कहानी और धरातल की हकीकत के बीच एक बड़ा विरोधाभास उभरकर सामने आ रहा है।

रोहित शेट्टी केस में गिरफ्तार आगरा के युवक और उनके परिजन
रोहित शेट्टी केस में गिरफ्तार आगरा के युवक और उनके परिजन







गिरफ्तार किए गए पांच युवकों—दीपक शर्मा, रितिक यादव, सन्नी जाटव, सोनू पुरवंशी और विष्णु कुशवाहा—के परिजनों और ग्रामीणों का दावा है कि ये सभी निर्दोष हैं और इन्हें साजिश के तहत फंसाया जा रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बाह पुलिस के रिकॉर्ड में इन पांचों युवकों के खिलाफ स्थानीय स्तर पर एक भी आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं है। ग्रामीणों और स्थानीय नेताओं का कहना है कि जो लड़के अपने घर की रोजी-रोटी चलाने के लिए दूसरे राज्यों में मजदूरी और छोटे-मोटे काम कर रहे थे, उनका इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय क्राइम सिंडिकेट से जुड़ना समझ से परे है।

मुंबई क्राइम ब्रांच और एसटीएफ के अनुसार, मुख्य शूटर दीपक शर्मा विदेश में बैठे गैंगस्टर हरि बॉक्सर के संपर्क में था। पुलिस का दावा है कि इस पूरी वारदात के पीछे शुभम लोनकर गिरोह का हाथ है। जांच रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि सन्नी जाटव और सोनू पुरवंशी ने रोहित शेट्टी के घर की रेकी की थी, जबकि रितिक यादव ने आरोपियों को छिपने में मदद पहुंचाई थी। विष्णु कुशवाहा का नाम पुलिस ने एक पुरानी मोबाइल छीनने की घटना से जोड़ा है, लेकिन परिजनों का कहना है कि वह मामला थाने के बाहर ही निपट गया था और उसका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं है।

गिरफ्तार आरोपी फोटो : UP prime news







परिजनों का दुख और आक्रोश अब सड़कों पर दिखाई दे रहा है। रितिक यादव के दादा रामजी का कहना है कि उनका पोता झज्जर (हरियाणा) की एक कंपनी में सुपरवाइजर के रूप में काम कर रहा था और पुलिस ने उसे उसके कार्यस्थल से ही उठाया है। वहीं, दीपक शर्मा की मां विद्यावती ने सवाल उठाया है कि जो बेटा दिल्ली के एक होटल में काम कर रहा था, वह अचानक मुंबई की वारदात में कैसे शामिल हो गया? सन्नी जाटव की दादी प्रेमा देवी बदहवास हालत में हैं; उनका कहना है कि उनका पोता दिल्ली में फल और सब्जियां बेचकर परिवार का पेट पालता था।

बिजौली गांव के पूर्व ब्लॉक प्रमुख दिलीप वर्मा और पूर्व प्रधान इदरीश ने भी इन गिरफ्तारियों पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि इन युवाओं की आर्थिक स्थिति और उनके पिछले आचरण को देखते हुए पुलिस की कहानी गले नहीं उतरती। विष्णु कुशवाहा के पिता सूरजपाल और माता रामसखी सीसीटीवी फुटेज जुटाने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि यह साबित किया जा सके कि वारदात के दिन विष्णु गांव में ही मौजूद था। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने उनके मोबाइल फोन का गलत इस्तेमाल कर उन्हें फंसाने वाले मैसेज प्लांट किए हैं।

फिलहाल, इस मामले ने कानूनी और मानवीय दोनों पहलुओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ जहां सुरक्षा एजेंसियां इसे एक बड़ी सफलता मान रही हैं, वहीं दूसरी तरफ आगरा के एक छोटे से गांव में पांच परिवारों के सामने रोजी-रोटी और मान-सम्मान का संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों की मांग है कि इस मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए ताकि किसी बेगुनाह को सजा न मिले।

खबर का बैकग्राउंड:

31 जनवरी की रात मुंबई के जुहू स्थित फिल्म निर्माता रोहित शेट्टी के घर के बाहर अज्ञात हमलावरों ने फायरिंग की थी। इस घटना के बाद मुंबई क्राइम ब्रांच ने जांच तेज की और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर हरियाणा एसटीएफ के साथ मिलकर 15 फरवरी को आगरा के बाह से संबंधित पांच युवाओं को गिरफ्तार किया। पुलिस इन्हें लॉरेंस बिश्नोई और शुभम लोनकर गैंग का हिस्सा बता रही है।

पब्लिक इम्पैक्ट:

इस घटना से ग्रामीण इलाकों में पुलिस की कार्यप्रणाली के प्रति अविश्वास और भय का माहौल है। युवाओं के करियर और परिवारों की सामाजिक प्रतिष्ठा पर सीधा प्रहार हुआ है। यदि पुलिस के आरोप गलत साबित होते हैं, तो यह न्याय प्रणाली पर जनता के भरोसे को कमजोर करेगा। वहीं, अगर आरोप सही हैं, तो यह ग्रामीण युवाओं के अपराध की दुनिया में बढ़ते आकर्षण की ओर एक गंभीर इशारा है।

UP Prime News एनालिसिस:

यह मामला सुरक्षा एजेंसियों की इंटेलिजेंस और स्थानीय वास्तविकता के बीच के टकराव को दर्शाता है। किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले साक्ष्यों का अदालती परीक्षण अनिवार्य है, क्योंकि परिजनों द्वारा पेश किए गए 'वर्किंग रिकॉर्ड' और पुलिस की 'कॉन्स्पिरेंसी थ्योरी' में बड़ा अंतर है।

आगरा | UP Prime News

Published: February 20, 2026 | 09:07 AM IST

By UP Prime News Desk







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