साइबर ठगी के पीड़ितों को बड़ी राहत: अब ₹50,000 तक की रकम के लिए नहीं काटने होंगे कोर्ट के चक्कर, नई एसओपी जारी
गोरखपुर (उत्तर प्रदेश):
देशभर में तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों पर लगाम लगाने और पीड़ितों को त्वरित न्याय दिलाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। गृह मंत्रालय की ओर से जारी नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत अब साइबर धोखाधड़ी के शिकार हुए लोगों को ₹50,000 तक की ठगी गई राशि वापस पाने के लिए अदालत के आदेश का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। नई व्यवस्था के अनुसार, यदि जांच में मामला सही पाया जाता है, तो संबंधित एजेंसियां और पुलिस सीधे बैंक के माध्यम से पीड़ित की रकम रिलीज करा सकेंगी।
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| सांकेतिक फोटो : UP prime news |
अब तक की व्यवस्था में स्थिति काफी जटिल थी। यदि किसी व्यक्ति के साथ कुछ हजार रुपयों की भी ठगी होती थी, तो उस रकम को वापस पाने के लिए पीड़ित को लंबी अदालती प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था। इसमें महीनों का समय लग जाता था और अक्सर कानूनी खर्च ठगी गई राशि से भी अधिक हो जाता था। नई गाइडलाइन के आने से अब छोटे निवेशकों और आम नागरिकों को बड़ी राहत मिली है, जो साइबर अपराधियों के आसान शिकार बन जाते थे।
90 दिनों में अनफ्रीज होंगे बैंक खाते
इस नई एसओपी का एक और महत्वपूर्ण पहलू बैंक खातों को अनफ्रीज करने से जुड़ा है। साइबर ठगी की शिकायत मिलते ही पुलिस और साइबर सेल संबंधित बैंक खातों को तुरंत फ्रीज कर देते हैं ताकि पैसा आगे ट्रांसफर न हो सके। हालांकि, इस प्रक्रिया में कई बार उन लोगों के खाते भी लंबे समय तक बंद रह जाते थे, जिनका अपराध से सीधा संबंध नहीं होता था। नई गाइडलाइन के मुताबिक, जांच के दौरान फ्रीज किए गए खातों को अब अधिकतम 90 दिनों के भीतर अनफ्रीज करना अनिवार्य होगा। इससे जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और बेवजह की देरी से खाताधारकों को होने वाली परेशानी खत्म होगी।
पुलिस ने शुरू की कार्रवाई
गोरखपुर जोन के साइबर कमांडो उपेन्द्र सिंह ने जानकारी दी है कि नई गाइडलाइन के आधार पर पुलिस ने सक्रिय रूप से कार्य करना शुरू कर दिया है। उन्होंने बताया कि पहले छोटी रकम की वापसी के लिए भी पीड़ित को कोर्ट के चक्कर लगाने पड़ते थे, जिससे लोग शिकायत करने से भी कतराते थे। अब प्रक्रिया सरल होने से पीड़ितों का पुलिस और सिस्टम पर भरोसा बढ़ेगा। पुलिस अब सीधे बैंकों के साथ समन्वय स्थापित कर पीड़ित के खाते में पैसा वापस दिलाने की प्रक्रिया को तेज कर रही है।
सावधानी ही बचाव: बस्ती का उदाहरण
जहाँ एक तरफ सरकार नियमों को सरल बना रही है, वहीं दूसरी तरफ ठग नए-नए तरीके अपना रहे हैं। हाल ही में बस्ती जिले के गौर थाना क्षेत्र से एक मामला सामने आया है, जहाँ बेतौहा निवासी एक व्यक्ति से ₹2.20 लाख की ठगी कर ली गई। जालसाजों ने पीड़ित को फोन कर उसके दोस्त के दुबई में फंसने और पासपोर्ट-वीजा जब्त होने की झूठी कहानी सुनाई। घबराहट में पीड़ित ने ठगों द्वारा भेजे गए क्यूआर कोड के माध्यम से पैसे ट्रांसफर कर दिए। थाना प्रभारी अतुल कुमार अंजान ने मामले की पुष्टि करते हुए आईटी एक्ट के तहत केस दर्ज कर लिया है और लोगों से किसी भी अनजान क्यूआर कोड या लिंक पर क्लिक न करने की अपील की है।
खबर का बैकग्राउंड:
भारत में साइबर अपराधों की बढ़ती संख्या को देखते हुए गृह मंत्रालय और नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल निरंतर अपनी कार्यप्रणाली में सुधार कर रहे हैं। इससे पहले पीड़ितों को अपनी ही मेहनत की कमाई वापस पाने के लिए सालों तक मुकदमों का बोझ सहना पड़ता था। इस प्रशासनिक सुधार का मुख्य उद्देश्य 'इज ऑफ जस्टिस' यानी न्याय की सुलभता को बढ़ावा देना है।
पब्लिक इम्पैक्ट:
इस निर्णय का सीधा लाभ उन लाखों मध्यमवर्गीय परिवारों और छात्रों को मिलेगा जो अक्सर 'वर्क फ्रॉम होम' या 'केवाईसी अपडेट' के नाम पर होने वाली छोटी ठगी का शिकार होते हैं। अब ₹50,000 तक की सीमा तय होने से पुलिस को भी त्वरित निर्णय लेने का अधिकार मिला है, जिससे जनता के समय और धन दोनों की बचत होगी। साथ ही, 90 दिनों में खाता अनफ्रीज होने के नियम से व्यापारिक लेनदेन करने वालों को बड़ी राहत मिलेगी।
UP Prime News एनालिसिस:
सरकार की यह नई एसओपी तकनीकी रूप से पुलिस को सशक्त बनाती है और न्यायिक बोझ को कम करती है। हालांकि, इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि जमीनी स्तर पर पुलिस और बैंक कितनी तत्परता से समन्वय बिठा पाते हैं।
गोरखपुर | UP Prime News
Published: March 10, 2026 | 10:23 AM IST
By UP Prime News Desk

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