यूपी में रजिस्ट्री के नए नियम: एक घंटे में करानी होगी रजिस्ट्री, नहीं तो स्लॉट होगा निरस्त; जानें 1 अप्रैल से क्या-क्या बदलेगा
लखनऊ उत्तर प्रदेश :
उत्तर प्रदेश में संपत्ति की खरीद-फरोख्त करने वालों के लिए एक बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में रजिस्ट्री प्रक्रिया को और अधिक परदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए कई अहम बदलावों को मंजूरी दी गई है। नए नियमों के मुताबिक, अब प्रदेश में रजिस्ट्री के लिए बुक किए गए स्लॉट की समय सीमा तय कर दी गई है। अगर कोई व्यक्ति अपने निर्धारित स्लॉट के एक घंटे के भीतर रजिस्ट्री कार्यालय नहीं पहुंचता है या प्रक्रिया शुरू नहीं कराता है, तो उसका स्लॉट स्वतः ही निरस्त (कैंसिल) कर दिया जाएगा।
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| उत्तर प्रदेश संपत्ति रजिस्ट्री नए नियम 2026 |
यह नई व्यवस्था आगामी 1 अप्रैल से पूरे प्रदेश में प्रभावी रूप से लागू कर दी जाएगी। सरकार का तर्क है कि इस व्यवस्था से निबंधन कार्यालयों में होने वाली अनावश्यक भीड़ को नियंत्रित किया जा सकेगा और सर्वर पर पड़ने वाले अचानक लोड को कम किया जा सकेगा। अक्सर देखा जाता था कि लोग सुबह का स्लॉट बुक करते थे लेकिन शाम तक कार्यालय पहुंचते थे, जिससे शाम के समय सर्वर डाउन होने की समस्या पैदा हो जाती थी। अब नए नियम के तहत, यदि किसी का स्लॉट निरस्त होता है, तो उसे अगले दिन या उपलब्ध होने पर नया स्लॉट प्राप्त करना होगा, तभी रजिस्ट्री की प्रक्रिया आगे बढ़ पाएगी।
रजिस्ट्री प्रक्रिया में दूसरा सबसे बड़ा बदलाव धोखाधड़ी और जालसाजी को रोकने के लिए किया गया है। अब किसी भी संपत्ति की रजिस्ट्री करने से पहले 'खतौनी' और 'मालिकाना हक' की गहनता से जांच की जाएगी। योगी सरकार ने यह फैसला इसलिए लिया है ताकि एक ही जमीन को बार-बार अलग-अलग लोगों को बेचने की प्रवृत्ति पर लगाम कसी जा सके। अब तक कई ऐसे मामले सामने आए हैं जहां विवादित या सरकारी जमीन की भी रजिस्ट्री कर दी जाती थी। नई व्यवस्था के तहत, जब तक विभाग जमीन के मालिकाना हक की पुष्टि नहीं कर लेगा, तब तक दस्तावेज का पंजीकरण संभव नहीं होगा।
इसके साथ ही, राज्य सरकार ने पंजीकरण अधिनियम-1908 की धारा-35 में संशोधन का प्रस्ताव भी तैयार किया है। वर्तमान में, उप निबंधक (Sub-Registrar) के पास किसी दस्तावेज के पंजीकरण से इनकार करने के अधिकार बहुत सीमित हैं। इस कारण कई बार विवादित, कुर्क की गई संपत्तियों या सरकारी जमीनों की भी रजिस्ट्री हो जाती थी, जो बाद में लंबे कानूनी विवादों का कारण बनती थी। अब इस संशोधन के बाद उप निबंधकों को अधिक अधिकार दिए जाएंगे ताकि वे संदिग्ध मामलों में पंजीकरण रोक सकें। इस प्रस्ताव को भारतीय संविधान की 7वीं अनुसूची की समवर्ती सूची के तहत लाया गया है, जिसे जल्द ही विधानमंडल में प्रस्तुत किया जाएगा।
हालांकि, इन नए नियमों को लेकर वकीलों और दस्तावेज लेखकों के बीच चिंता भी देखी जा रही है। अधिवक्ताओं का कहना है कि 1 घंटे की समय सीमा तभी सफल हो पाएगी जब निबंधन विभाग का सर्वर सुचारू रूप से काम करे। यदि सर्वर डाउन होने के कारण देरी होती है और स्लॉट निरस्त हो जाता है, तो इसमें आम जनता का नुकसान होगा। अधिवक्ताओं ने मांग की है कि नियम लागू करने से पहले तकनीकी बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जाए और सर्वर खराब होने की स्थिति में अतिरिक्त समय देने का प्रावधान रखा जाए।
खबर का बैकग्राउंड:
उत्तर प्रदेश में जमीन से जुड़े विवाद और धोखाधड़ी के मामले अदालतों में सबसे अधिक हैं। एक ही भूखंड को कई बार बेचना या फर्जी कागजात के आधार पर दूसरे की जमीन की रजिस्ट्री कर देना एक बड़ी समस्या रही है। इसी को देखते हुए योगी सरकार ने डिजिटल तकनीक और कानूनी सख्ती का समन्वय करने का फैसला लिया है। सरकार का लक्ष्य रजिस्ट्री कार्यालयों को 'बिचौलिया मुक्त' बनाना और आम नागरिकों के निवेश को सुरक्षित करना है।
पब्लिक इम्पैक्ट:
इस फैसले का सीधा असर प्रदेश के करोड़ों लोगों पर पड़ेगा। सकारात्मक पक्ष यह है कि खरीदारों को अब यह भरोसा रहेगा कि जिस जमीन की वे रजिस्ट्री करा रहे हैं, उसका मालिकाना हक पूरी तरह साफ है। इससे भविष्य में होने वाली कानूनी मुकदमेबाजी कम होगी। वहीं, नकारात्मक पक्ष यह हो सकता है कि समय की पाबंदी के कारण दूर-दराज से आने वाले लोगों को परेशानी हो सकती है। सर्वर की उपलब्धता और बिजली जैसी तकनीकी बाधाएं इस नई व्यवस्था के लिए सबसे बड़ी चुनौती साबित हो सकती हैं।
UP Prime News एनालिसिस:
सरकार का यह कदम 'ई-गवर्नेंस' और 'पारदर्शिता' की दिशा में सराहनीय है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसके सफल क्रियान्वयन के लिए सर्वर की क्षमता बढ़ाना अनिवार्य है। बिना तकनीकी सुधार के समय की पाबंदी जनता के लिए सिरदर्द भी बन सकती है।
LUCKNOW | UP Prime News
Published: March 11, 2026 | 04:38 PM IST
By UP Prime News Desk

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