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UP में 1 जून से बिना 'किसान आईडी' नहीं मिलेगी खाद: पीएम किसान की किस्त पर भी मंडराया संकट, जानें पूरी नई व्यवस्था

  लखनऊ उत्तर प्रदेश:

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता लाने और बिचौलियों के दखल को पूरी तरह समाप्त करने के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। प्रदेश में अब खाद (Fertilizer) की खरीद और विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए 'किसान आईडी' (Farmer ID) को अनिवार्य कर दिया गया है। कृषि विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, आगामी 1 जून से यह नई व्यवस्था पूरे प्रदेश में लागू कर दी जाएगी। इसके बाद, किसी भी किसान को सरकारी या निजी खाद केंद्रों से यूरिया, डीएपी या अन्य उर्वरक खरीदने के लिए अपनी विशिष्ट किसान पहचान संख्या प्रस्तुत करनी होगी। बिना इस आईडी के ई-पॉस (e-PoS) मशीन के जरिए खाद का ट्रांजेक्शन संभव नहीं हो सकेगा।

उत्तर प्रदेश किसान आईडी और खाद वितरण नियम 2026
उत्तर प्रदेश किसान आईडी सांकेतिक फोटो : UP prime news







इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा और सीधा असर प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM Kisan Samman Nidhi) के लाभार्थियों पर पड़ने वाला है। विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में लगभग 1.75 करोड़ से अधिक किसान पीएम किसान योजना के तहत पंजीकृत हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से करीब 10 लाख किसानों की अभी तक किसान आईडी नहीं बन पाई है। यदि ये किसान समय रहते अपना पंजीकरण पूर्ण नहीं करते हैं, तो उनकी अगली किस्त रुक सकती है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में केवल उन्हीं किसानों को सरकारी अनुदान और सहायता दी जाएगी, जिनका नाम 'किसान रजिस्ट्री' में दर्ज होगा और जिनके पास सक्रिय किसान आईडी होगी।

विस्तृत जानकारी और पंजीकरण प्रक्रिया:

प्रदेश में किसानों के खेत के खाता नंबर और रकबा (Area) को उनके आधार कार्ड से लिंक करके 'किसान रजिस्ट्री' तैयार की जा रही है। इसी रजिस्ट्री के आधार पर किसानों को एक यूनिक आईडी प्रदान की जाती है, जो उनकी डिजिटल पहचान बनती है। उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के कुल 2.88 करोड़ किसानों की आईडी तैयार करने का लक्ष्य रखा है। हालांकि, अभी तक केवल 2 करोड़ किसानों का ही डेटाबेस तैयार हो सका है। शेष बचे 88 लाख किसानों का पंजीकरण सुनिश्चित करने के लिए सरकार अब युद्धस्तर पर काम कर रही है। कृषि विभाग ने अप्रैल माह के अंत तक शत-प्रतिशत पंजीकरण का लक्ष्य रखा है, ताकि खरीफ सीजन की शुरुआत से पहले सभी किसानों के पास अपनी आईडी हो।

खाद वितरण की प्रक्रिया को और अधिक सटीक बनाने के लिए कृषि विभाग ने प्रति हेक्टेयर खाद की मात्रा भी निर्धारित कर दी है। रबी सीजन के दौरान प्रति हेक्टेयर सात बोरी यूरिया और पांच बोरी डीएपी का मानक अपनाया गया था, जो काफी हद तक सफल रहा। अब किसान आईडी के माध्यम से ई-पॉस मशीन पर यह रिकॉर्ड रहेगा कि किस किसान ने कितनी खाद खरीदी है। यदि कोई किसान अपने निर्धारित कोटे से अधिक खाद खरीदने की कोशिश करेगा, तो सिस्टम उसे ब्लॉक कर देगा। खरीफ और रबी दोनों फसलों को मिलाकर एक किसान अधिकतम 14 बोरी यूरिया और 10 बोरी डीएपी प्राप्त कर सकेगा। इस व्यवस्था से खाद की कालाबाजारी और दूसरे राज्यों में होने वाली तस्करी पर पूरी तरह लगाम लगेगी।

खबर का बैकग्राउंड:

उत्तर प्रदेश सरकार पिछले एक साल से 'डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन' के तहत किसान रजिस्ट्री पर काम कर रही है। पहले खाद वितरण के लिए केवल आधार कार्ड का उपयोग होता था, लेकिन उसमें जमीन के रकबे का सही मिलान नहीं हो पाता था। इससे संपन्न किसान या बिचौलिये ज्यादा खाद उठा लेते थे और छोटे किसानों को किल्लत झेलनी पड़ती थी। अब आधार को सीधे भूमि रिकॉर्ड (खतौनी) से जोड़कर इस समस्या का स्थाई समाधान निकाला गया है। यह व्यवस्था केंद्र सरकार के डिजिटल इंडिया विजन का ही एक हिस्सा है।

पब्लिक इम्पैक्ट:

इस फैसले का व्यापक असर प्रदेश के करोड़ों किसानों पर पड़ेगा। सकारात्मक पक्ष यह है कि अब खाद की दुकानों पर लंबी लाइनें नहीं लगेंगी और वास्तविक किसानों को उनके हक की खाद आसानी से मिलेगी। सरकारी योजनाओं का पैसा सीधे और बिना किसी देरी के बैंक खातों में पहुंचेगा। हालांकि, ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट और तकनीकी जानकारी की कमी के कारण 88 लाख किसानों का पंजीकरण एक बड़ी चुनौती है। यदि निर्धारित समय के भीतर आईडी नहीं बनी, तो खरीफ सीजन में खाद की उपलब्धता को लेकर किसानों में अफरातफरी मच सकती है।

UP Prime News एनालिसिस:

किसान आईडी की अनिवार्यता खेती-किसानी को आधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा सुधार है। इससे सरकारी खजाने पर पड़ने वाले गलत सब्सिडी के बोझ को कम किया जा सकेगा। लेकिन प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि सर्वर की समस्याओं या तकनीकी खामियों की वजह से कोई भी पात्र किसान खाद या सम्मान निधि से वंचित न रह जाए। विशेष रूप से उन 10 लाख किसानों पर ध्यान देने की जरूरत है जिनकी किस्त रुकने की कगार पर है।

लखनऊ | UP Prime News

Published: 11 March 2026 | 11:40 AM IST

By UP Prime News Desk





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