डिप्रेशन या कुछ और? MD छात्रा डॉ. वर्तिका सिंह की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत, सीनियर डॉक्टर पर अभद्रता के आरोपों से जुड़ीं कड़ियां
उत्तर प्रदेश (आगरा):
ताजनगरी आगरा के हरीपर्वत थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कैलाशपुरी मार्ग स्थित मानसिक स्वास्थ्य संस्थान में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब वहां की प्रथम वर्ष की एमडी (MD) छात्रा डॉ. वर्तिका सिंह का शव उनके हॉस्टल के कमरे में संदिग्ध परिस्थितियों में पाया गया। 28 वर्षीय डॉ. वर्तिका सिंह, जो मूल रूप से लखनऊ की रहने वाली थीं, रविवार की रात अपने बिस्तर पर अचेत अवस्था में मिलीं। इस घटना के बाद संस्थान परिसर में मातम छा गया है और कई तरह के सवाल भी खड़े हो रहे हैं, क्योंकि मृतका ने कुछ समय पहले ही अपने एक सीनियर डॉक्टर पर अभद्रता के गंभीर आरोप लगाए थे।
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| डॉ. वर्तिका सिंह फोटो : UP Prime News |
मिली जानकारी के अनुसार, घटना की शुरुआत तब हुई जब डॉ. वर्तिका की मां ने रविवार को दिनभर अपनी बेटी को फोन किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। लगातार कॉल अनआंसर रहने के कारण घबराई मां ने वर्तिका के सहपाठी डॉ. सिद्धार्थ को फोन कर खैरियत जानने को कहा। शाम के समय जब डॉ. सिद्धार्थ, डॉ. शिखा ठाकुर और डॉ. सना रब्बानी वर्तिका के कमरे पर पहुंचे, तो दरवाजा अंदर से बंद था। काफी देर तक दस्तक देने और पुकारने के बाद भी जब अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई, तो सहकर्मियों ने अनहोनी की आशंका में धक्का देकर दरवाजा खोला। अंदर का नजारा देख सभी के होश उड़ गए; डॉ. वर्तिका अपने बेड पर पेट के बल बेसुध पड़ी थीं।
आनन-फानन में उन्हें तुरंत एसएन मेडिकल कॉलेज (SN Medical College) ले जाया गया, लेकिन वहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। अस्पताल प्रशासन द्वारा सूचना मिलने पर पुलिस की टीम और फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स मौके पर पहुंचे। शुरुआती जांच में डीसीपी सिटी अली अब्बास ने बताया कि यह मामला पहली नजर में नींद की गोलियों के ओवरडोज का लग रहा है। पुलिस का कहना है कि डॉ. वर्तिका पहले से ही अवसाद (Depression) से जूझ रही थीं और उनका इलाज भी चल रहा था। कमरे से साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है ताकि मौत की असल वजह का पता लगाया जा सके।
खबर का बैकग्राउंड:
इस दुखद घटना की जड़ें फरवरी महीने से जुड़ी मानी जा रही हैं। डॉ. वर्तिका सिंह ने 22 फरवरी को ही एमडी में प्रवेश लिया था। प्रवेश के कुछ समय बाद ही उन्होंने गाजियाबाद निवासी एक सीनियर रेजिडेंट डॉ. सार्थक पर अभद्रता और दुर्व्यवहार के आरोप लगाए थे। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए संस्थान द्वारा तीन डॉक्टरों की एक जांच कमेटी बनाई गई थी। हालांकि, जांच में आरोप साबित नहीं हो सके, जिसके बाद डॉ. वर्तिका काफी गहरे सदमे में थीं। बताया जा रहा है कि इससे पहले भी उन्होंने एक बार तनाव के चलते नींद की गोलियां खाई थीं, लेकिन तब समय रहते उन्हें बचा लिया गया था।
पब्लिक इम्पैक्ट:
एक उभरती हुई महिला डॉक्टर की इस तरह संदिग्ध मौत ने चिकित्सा संस्थानों में काम करने वाले जूनियर डॉक्टर्स के मानसिक स्वास्थ्य और कार्यस्थल पर सुरक्षा जैसे विषयों पर गंभीर बहस छेड़ दी है। जनता के बीच यह संदेश जा रहा है कि उच्च शिक्षा के संस्थानों में मानसिक दबाव और आपसी विवादों का उचित समाधान न होना कितना घातक हो सकता है। यह घटना भविष्य में ऐसे संस्थानों में शिकायत निवारण तंत्र (Grievance Redressal Mechanism) की पारदर्शिता और छात्रों की काउंसलिंग की आवश्यकता को मजबूती से रेखांकित करती है।
UP Prime News एनालिसिस:
प्रथम दृष्टया यह मामला मानसिक तनाव और आत्मघाती कदम का प्रतीत होता है, लेकिन एक सीनियर डॉक्टर पर लगे आरोपों के बाद जांच समिति का 'क्लीन चिट' देना और उसके बाद मौत होना, पुलिस की गहन जांच का विषय है। किसी भी नतीजे पर पहुंचने से पहले पोस्टमार्टम रिपोर्ट और आंतरिक विवादों की गहराई से जांच आवश्यक है।
आगरा | UP Prime News
Published: April 27, 2026 | 11:09 AM IST
By UP Prime News Desk

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