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महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर अखिलेश यादव का बीजेपी पर तीखा प्रहार, नोएडा में कम वेतन के मुद्दे पर भी घेरा

 उत्तर प्रदेश:

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। लखनऊ में विशेष संवाददाता और संसद के बाहर पत्रकारों से बातचीत के दौरान अखिलेश यादव ने महिला आरक्षण बिल की आड़ में 'अपनी मर्जी का परिसीमन' करने की कोशिशों का मुद्दा उठाया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि समाजवादी पार्टी महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, लेकिन जिस तरह से भाजपा इस बिल के बहाने भविष्य के चुनावी समीकरणों को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही है, वह लोकतंत्र और संविधान के लिए खतरनाक है।

अखिलेश यादव प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला आरक्षण और परिसीमन पर बयान देते हुए
अखिलेश यादव फोटो : UP prime news






अखिलेश यादव ने अपनी बात रखते हुए असम और जम्मू-कश्मीर में हुए हालिया परिसीमन का उदाहरण दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा परिसीमन के माध्यम से निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं को इस तरह से निर्धारित करना चाहती है जिससे उन्हें कभी चुनावी हार का सामना न करना पड़े। यादव ने कड़े शब्दों में कहा, "बीजेपी महिला आरक्षण के बहाने अपनी मर्जी का परिसीमन लाना चाहती है। हमने देखा है कि किस तरह असम और जम्मू-कश्मीर में निर्वाचन क्षेत्र बनाए गए। यह सीधे तौर पर चुनावी समीकरणों को प्रभावित करने की साजिश है।"

सपा प्रमुख ने केवल आरक्षण और परिसीमन तक ही अपनी बात सीमित नहीं रखी, बल्कि उन्होंने सरकार की जनगणना और सर्वेक्षण नीतियों पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि आज के समय में जानवरों और घरों की गिनती तो की जा रही है, लेकिन इंसानों (विशेषकर पिछड़ों और वंचितों) की उचित गणना से सरकार बच रही है। उन्होंने 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) के दौरान हुए अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में SIR के बहाने गुपचुप तरीके से एनआरसी (NRC) जैसी प्रक्रियाएं लागू करने की कोशिश की गई। उन्होंने भविष्य की ओर इशारा करते हुए जनता को सचेत किया कि आने वाले समय में एनआरसी के नाम पर नए-नए दस्तावेजों की मांग कर आम जनता को परेशान किया जा सकता है।

आर्थिक मोर्चे पर सरकार को घेरते हुए अखिलेश यादव ने नोएडा के श्रमिकों की स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने एक चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा कि देश में सबसे कम वेतन नोएडा में मिलता है, जो कि उत्तर प्रदेश का एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र है। 'डबल इंजन' सरकार पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि एक तरफ महंगाई आसमान छू रही है और दूसरी तरफ श्रमिकों के वेतन में उस अनुपात में वृद्धि नहीं की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ प्रभावशाली लोग सरकार के साथ मिले हुए हैं और अपने निजी स्वार्थ के लिए श्रमिकों का शोषण कर रहे हैं। अखिलेश के अनुसार, सरकार जानबूझकर नोएडा जैसे औद्योगिक क्षेत्र की छवि और वहां के कार्यबल के भविष्य को बर्बाद कर रही है।

इस पूरे घटनाक्रम में मैनपुरी से सपा सांसद डिंपल यादव ने भी भाजपा पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष महिला आरक्षण के साथ है और 2013 में भी 'नारी वंदन अधिनियम' (जो उस समय चर्चा में था) को लेकर सत्ता और विपक्ष एकमत थे। डिंपल यादव ने सरकार से सवाल पूछा कि इस संशोधन के पीछे सरकार की असली मंशा क्या है? उन्होंने समाजवादी पार्टी का रुख साफ करते हुए मांग की कि पहले देश में पारदर्शी तरीके से जनगणना कराई जानी चाहिए और उसके बाद ही परिसीमन और आरक्षण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाना चाहिए ताकि वास्तविकता के आधार पर आरक्षण लागू हो सके।

समाजवादी पार्टी के इन तेवरों से साफ है कि आने वाले समय में महिला आरक्षण का क्रियान्वयन और परिसीमन की प्रक्रिया एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनने वाली है। विपक्ष ने साफ कर दिया है कि वह केवल बिल के पास होने से संतुष्ट नहीं है, बल्कि उसके पीछे की प्रक्रियाओं और मंशा पर कड़ी नजर रखे हुए है।

खबर का बैकग्राउंड:

महिला आरक्षण बिल भारतीय राजनीति में दशकों से लंबित एक महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है। वर्तमान सरकार ने इसे संसद में पेश कर कानून बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं, लेकिन इसके साथ जुड़ी 'परिसीमन' की शर्त ने विवाद पैदा कर दिया है। विपक्ष का मानना है कि जनगणना और परिसीमन के बहाने इस बिल के वास्तविक कार्यान्वयन में देरी की जा रही है और इसका इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं को बदलने में किया जा सकता है।

पब्लिक इम्पैक्ट:

इस राजनीतिक बहस का सीधा असर देश की आधी आबादी और सामान्य मतदाताओं पर पड़ेगा। यदि परिसीमन में पारदर्शिता नहीं रहती है, तो मतदाताओं का प्रतिनिधित्व प्रभावित हो सकता है। वहीं, नोएडा में कम वेतन के मुद्दे ने औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले लाखों श्रमिकों के बीच आर्थिक सुरक्षा और न्यूनतम मजदूरी को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है, जिससे सरकार पर नीतिगत सुधार का दबाव बढ़ेगा।

UP Prime News एनालिसिस:

अखिलेश यादव का यह बयान केवल विरोध नहीं, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनावों और भविष्य की राजनीति के लिए जमीन तैयार करने की कोशिश है। महिला आरक्षण पर 'कंडीशनल सपोर्ट' देकर सपा ने खुद को महिला विरोधी कहलाने से बचा लिया है और परिसीमन पर सवाल उठाकर सरकार की घेराबंदी तेज कर दी है।

लखनऊ | UP Prime News

Published: April 18, 2026 | 08:22 AM IST

By UP Prime News Desk





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