देवरिया शिक्षक आत्महत्या मामला: निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और क्लर्क भगोड़ा घोषित, पुलिस ने बढ़ाया ईनाम
उत्तर प्रदेश:
देवरिया जिले में शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या के मामले ने अब एक नया कानूनी मोड़ ले लिया है। इस प्रकरण में लंबे समय से फरार चल रही जिले की निलंबित बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। ताजा जानकारी के मुताबिक, बार-बार गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी होने के बावजूद अदालत में पेश न होने पर पुलिस अब इन दोनों आरोपियों को औपचारिक रूप से भगोड़ा घोषित करने की तैयारी में है। पुलिस ने इस संबंध में न्यायालय में आवेदन करने का निर्णय लिया है।
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| देवरिया निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और क्लर्क संजीव सिंह की फोटो |
प्रशासनिक गलियारों में इस खबर से हड़कंप मचा हुआ है। पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय के निर्देशानुसार, इन दोनों आरोपियों पर गिरफ्तारी के लिए घोषित इनाम की राशि को भी बढ़ा दिया गया है। पहले जहां दोनों पर 10-10 हजार रुपये का इनाम था, उसे अब बढ़ाकर 25-25 हजार रुपये कर दिया गया है। गौरतलब है कि इस मामले में एक अन्य आरोपी, सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध सिंह को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है, लेकिन मुख्य आरोपी कही जा रही बीएसए और लिपिक अभी भी कानून की पहुंच से बाहर हैं।
पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि इस संवेदनशील मामले में साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश की गई थी। सूत्रों के अनुसार, बीएसए कार्यालय में लगे सीसीटीवी के डीवीआर (DVR) के साथ संदिग्ध गतिविधियां पाई गई हैं, ताकि वास्तविक घटनाक्रम और बातचीत के सबूतों को दबाया जा सके। गोरखपुर पुलिस ने जब कार्यालय के अन्य कर्मचारियों से पूछताछ की, तो विभाग के भीतर चल रहे कई और चौंकाने वाले तथ्यों का खुलासा हुआ है। पुलिस अब एक-एक कड़ी जोड़कर फरार अधिकारियों की लोकेशन ट्रैक करने की कोशिश कर रही है।
खबर का बैकग्राउंड:
कुशीनगर के रहने वाले सहायक अध्यापक कृष्ण मोहन सिंह ने 21 फरवरी को फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। मरने से पहले उन्होंने एक सुसाइड नोट और वीडियो छोड़ा था, जिसमें निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, क्लर्क संजीव सिंह और अनिरुद्ध सिंह पर बहाली के नाम पर 16 लाख रुपये की रिश्वत मांगने और मानसिक उत्पीड़न का गंभीर आरोप लगाया था। इसी के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज किया था।
पब्लिक इम्पैक्ट:
एक शिक्षक द्वारा प्रशासनिक प्रताड़ना के कारण जान देने की घटना ने आम जनता और शिक्षक समाज के बीच गहरा रोष पैदा कर दिया है। शिक्षा विभाग के शीर्ष अधिकारियों पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों से विभाग की छवि धूमिल हुई है। भगोड़ा घोषित करने की कार्रवाई से जनता में यह संदेश जाएगा कि कानून के सामने पद और रसूख मायने नहीं रखता, जिससे पुलिस व्यवस्था पर लोगों का विश्वास मजबूत होगा।
UP Prime News एनालिसिस:
यह मामला सरकारी तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार और उसके घातक परिणामों का स्पष्ट उदाहरण है। किसी अधिकारी का फरार होना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि प्रशासनिक नैतिकता का भी पतन दर्शाता है।
देवरिया | UP Prime News
Published: April 28, 2026 | 09:45 AM IST
By UP Prime News Desk

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