मेरठ: बेटी की लाश के साथ दो महीने गुजारने वाला पिता गिरफ्तार, दिल दहला देगी कमरे की खौफनाक हकीकत
उत्तर प्रदेश (मेरठ):
मेरठ के सदर बाजार थाना क्षेत्र स्थित तेली मोहल्ले से एक ऐसी रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना सामने आई है, जिसने मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक ढांचे पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ एक 76 वर्षीय रिटायर्ड क्लर्क, उदय भानु विश्वास, अपनी 33 वर्षीय बेटी प्रियंका विश्वास के शव के साथ करीब दो महीने तक एक ही घर में रहता रहा। यह मामला तब उजागर हुआ जब शुक्रवार शाम आरोपी पिता को उसके एक रिश्तेदार ने दिल्ली रोड पर देखा और सख्ती से पूछताछ की। पुलिस ने अब आरोपी पिता को हिरासत में ले लिया है और मामले की गहन तफ्तीश शुरू कर दी है।
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| प्रियंका फोटो: U P prime news |
जानकारी के अनुसार, यह सिलसिला अक्टूबर महीने से शुरू हुआ था। प्रियंका, जो एक निजी स्कूल में शिक्षिका थी, सितंबर के महीने में पीलिया (जौंडिस) से ग्रसित हो गई थी। बीमारी के कारण उसने स्कूल जाना बंद कर दिया था और घर पर ही उसका इलाज चल रहा था। बताया जा रहा है कि अक्टूबर में प्रियंका की मृत्यु हो गई, लेकिन पिता ने किसी को भी इसकी सूचना नहीं दी और न ही अंतिम संस्कार किया। इसके बजाय, वह बेटी के शव के साथ उसी घर में रहने लगा। बदबू को दबाने के लिए उसने अमानवीय और बेहद चौंकाने वाले तरीके अपनाए, जिसे सुनकर पुलिस अधिकारी भी दंग रह गए।
मामले का खुलासा उस वक्त हुआ जब 15 दिसंबर को उदय भानु घर पर ताला लगाकर अचानक गायब हो गया। शुक्रवार शाम को प्रियंका के चचेरे भाई सुब्रतो ने उदय भानु को दिल्ली रोड पर एक चाय के खोखे के पास बैठे देखा। जब परिजनों ने उदय भानु को पकड़ा और प्रियंका के बारे में पूछा, तो वह उन्हें गुमराह करने लगा। वह कभी कहता कि प्रियंका देहरादून में भर्ती है, तो कभी गाजियाबाद के किसी अस्पताल का नाम लेता। शक गहराने पर जब पुलिस को सूचना दी गई और घर का ताला खोला गया, तो अंदर का मंजर रूह कंपा देने वाला था। प्रियंका का शव पूरी तरह सड़ चुका था और उसे छिपाने की नाकाम कोशिशें की गई थीं।
खबर का बैकग्राउंड:
उदय भानु विश्वास उत्तर प्रदेश शिक्षा बोर्ड से क्लर्क के पद से रिटायर हुए थे। उनका परिवार लंबे समय से मेरठ के तेली मोहल्ले में रह रहा था। परिवार की पृष्ठभूमि दुखों से भरी रही है; करीब 13 साल पहले उदय भानु की पत्नी शर्मिष्ठा विश्वास ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी। तब से पिता और बेटी ही इस घर में साथ रहते थे। प्रियंका की बीमारी और फिर उसकी मौत के बाद उदय भानु की मानसिक स्थिति पर भी अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर किन परिस्थितियों में एक पिता ने अपनी ही संतान के शव के साथ इतने दिन बिताए।
पब्लिक इम्पैक्ट:
इस घटना ने शहरी इलाकों में बढ़ती सामाजिक दूरी और 'अकेलेपन' की समस्या को उजागर किया है। पड़ोसियों को दो महीने तक घर के अंदर चल रही इस भयावह स्थिति की भनक न लगना, हमारे सामाजिक परिवेश की संवेदनहीनता को दर्शाता है। यह खबर आम जनता के बीच मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और बुजुर्गों की काउंसलिंग की जरूरत पर जोर देती है। साथ ही, यह घटना लोगों को अपने आसपास रहने वाले परिवारों के प्रति अधिक सतर्क और संवेदनशील बनने का संदेश देती है।
UP Prime News एनालिसिस:
यह मामला केवल एक आपराधिक कृत्य नहीं, बल्कि गंभीर मनोवैज्ञानिक विकार और सामाजिक अलगाव का परिणाम प्रतीत होता है। कानून की नजर में यह साक्ष्यों को छिपाने का मामला है, लेकिन मानवीय दृष्टिकोण से यह एक गहरे मानसिक अवसाद की ओर इशारा करता है।
मेरठ | UP Prime News
Published: 11 April 2026 | 08:51 AM IST
By UP Prime News Desk

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