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यूपी एटीएस का बड़ा खुलासा: एक्स-मुस्लिमों की हत्या की साजिश नाकाम, नोएडा से दो संदिग्ध गिरफ्तार

 नोएडा (उत्तर प्रदेश)]:

उत्तर प्रदेश पुलिस की एंटी टेररिज्म स्क्वाड (ATS) ने एक बड़ी आतंकी साजिश को विफल करते हुए नोएडा से दो संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों की पहचान तुषार (मेरठ निवासी) और समीर (दिल्ली निवासी) के रूप में हुई है। एटीएस के मुताबिक, इन दोनों के निशाने पर मुख्य रूप से सलीम वास्तिक और सोशल मीडिया पर सक्रिय अन्य पूर्व-मुस्लिम (एक्स-मुस्लिम) लोग थे। जांच में सामने आया है कि ये आरोपी पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) और गैंगस्टर शहजाद भट्टी के इशारे पर काम कर रहे थे।

नोएडा में यूपी एटीएस द्वारा गिरफ्तार संदिग्धों की खबर
नोएडा में यूपी एटीएस द्वारा गिरफ्तार संदिग्ध फोटो 






गिरफ्तारी के बाद हुई पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। आरोपियों ने स्वीकार किया है कि उन्हें सलीम वास्तिक और अन्य एक्स-मुस्लिमों की 'टारगेट किलिंग' का जिम्मा सौंपा गया था। इसके लिए उन्हें बकायदा ट्रेनिंग और निर्देश दिए जा रहे थे। इस पूरी योजना का मकसद समाज में दहशत फैलाना और कट्टरपंथी विचारधारा को बढ़ावा देना था। जांच अधिकारियों के अनुसार, तुषार और समीर पिछले काफी समय से इस आतंकी साजिश का हिस्सा बने हुए थे और नए युवाओं को भी इस नेटवर्क से जोड़ने के काम में लगे थे।

जांच में यह भी पता चला है कि तुषार ने अपना धर्मांतरण कर लिया था और अपना नया नाम 'हिजबुल्लाह अली' रख लिया था। एटीएस अब इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही है कि उसका धर्मांतरण कब, कहां और किसने कराया। साथ ही, उसके पुराने फोन की भी तलाश की जा रही है, जिसे उसने गिरफ्तारी से कुछ समय पहले छिपा दिया था। अधिकारियों को संदेह है कि उस फोन में कई महत्वपूर्ण डेटा और संपर्क सूत्र मौजूद हो सकते हैं, जो इस पूरे नेटवर्क की और भी कड़ियां खोल सकते हैं।

गैंगस्टर शहजाद भट्टी और इन आरोपियों के बीच हफ्ते में कम से कम दो से तीन बार बातचीत होती थी। आरोपियों को काम पूरा करने के बाद सुरक्षित दुबई भेजने का लालच दिया गया था और इसके लिए कुछ रकम एडवांस के तौर पर भी दी गई थी। फिलहाल, एटीएस ने दोनों के मोबाइल फोन जब्त कर फोरेंसिक लैब भेज दिए हैं ताकि हटाए गए डेटा को रिकवर किया जा सके। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए यूपी पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों को भी अलर्ट कर दिया गया है, ताकि अन्य एक्स-मुस्लिमों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

खबर का बैकग्राउंड:

इस साजिश के तार फरवरी 2026 में गाजियाबाद के लोनी में सलीम वास्तिक पर हुए हमले से जुड़े हैं। उस समय दो हमलावरों ने सलीम पर जानलेवा हमला किया था, जिसमें वह बाल-बाल बचे थे। बाद में पुलिस मुठभेड़ में दो हमलावर जीशान और गुलफाम मारे गए थे। अब पकड़े गए आरोपियों तुषार और समीर को उन्हीं हमलावरों की मौत का बदला लेने और दोबारा सलीम वास्तिक पर हमला करने का टास्क दिया गया था।

पब्लिक इम्पैक्ट:

इस तरह की साजिशों का खुलासा होने से आम जनता के बीच सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ती है। साथ ही, यह घटना सोशल मीडिया पर सक्रिय लोगों के लिए भी चेतावनी है कि वे अपनी निजी सुरक्षा के प्रति जागरूक रहें। प्रशासन द्वारा की गई इस त्वरित कार्रवाई से समाज में यह संदेश गया है कि आतंकी मंसूबों को पालने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जिससे सांप्रदायिक सौहार्द बना रहे।

UP Prime News एनालिसिस:

जांच एजेंसियों की सतर्कता ने एक बार फिर प्रदेश को दहलाने वाली साजिश को समय रहते कुचल दिया है। बाहरी ताकतों द्वारा स्थानीय युवाओं के धर्मांतरण और उन्हें कट्टरपंथी अपराधों की ओर धकेलना एक गंभीर चिंता का विषय है, जिस पर निरंतर निगरानी की आवश्यकता है।

[नोएडा] | UP Prime News

Published: [April 24, 2026] | [08:36 AM] IST

By UP Primej News Desk





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