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वाराणसी में रेलवे मॉडल स्टेशन परियोजना के तहत अवैध 'अजगैब शहीद मस्जिद' पर चला प्रशासन का बुलडोजर, भारी पुलिस बल के साथ आधी रात को हुई कार्रवाई

 वाराणसी (उत्तर प्रदेश):

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में मंगलवार की देर रात जिला प्रशासन, रेलवे और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने मिलकर एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। वाराणसी के आदमपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत किला कोहना (भदऊ चुंगी) पर स्थित लगभग 200 साल पुरानी 'अजगैब शहीद मजार' और उससे सटी मस्जिद को बुलडोजर की मदद से पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया गया। यह पूरी कार्रवाई काशी रेलवे स्टेशन के विस्तारीकरण और उसे एक आधुनिक मॉडल स्टेशन के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से की गई है। प्रशासनिक टीम ने सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच इस कार्रवाई को अंजाम दिया, ताकि क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की स्थिति पूरी तरह से सामान्य बनी रहे। 

फोटो : UP Prime News








इस पूरे अभियान को सुरक्षा और संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए बेहद गोपनीय और रणनीतिक तरीके से चलाया गया

 मंगलवार की रात करीब 11:00 बजे प्रशासनिक अधिकारी भारी पुलिस बल और पीएसी के जवानों के साथ नमो घाट और काशी स्टेशन के आसपास के इलाकों में पहुंचे । इसके बाद पूरे क्षेत्र की कड़े स्तर पर घेरेबंदी कर दी गई और किसी भी बाहरी व्यक्ति या मीडिया के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगा दी गई । लगभग छह बुलडोजरों और पोकलैंड मशीनों की मदद से रात करीब 12:10 बजे तक यानी महज एक घंटे के भीतर ढांचे को जमींदोज कर दिया गया । कार्रवाई के तुरंत बाद ही मौके पर एकत्रित मलबे को डंपरों और गाड़ियों की मदद से वहां से पूरी तरह साफ करवा दिया गया, जिससे सुबह के वक्त मार्ग पर कोई अवरोध न रहे। 

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सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ रखने के लिए मौके पर भारी पुलिस बल के साथ-साथ अर्धसैनिक बल और प्रांतीय रक्षक दल (पीएसी) के करीब एक हजार जवानों को तैनात किया गया था । इस दौरान अपर पुलिस आयुक्त शिवहरि मीणा, डीसीपी काशी गौरव बंसवाल, एडीसीपी काशी जोन वैभव बांगर, एसीपी कोतवाली विजय प्रताप सिंह और इंस्पेक्टर आदमपुर विमल मिश्रा के नेतृत्व में सुरक्षा बलों ने पूरे क्षेत्र की नाकेबंदी कर रखी थी। सुरक्षा के मद्देनजर नमो घाट की तरफ जाने वाले सभी रास्तों को बैरिकेडिंग करके बंद कर दिया गया था । त्वरित पुलिस कार्रवाई और कड़े इंतजामों के कारण कहीं भी विरोध या तनाव की स्थिति उत्पन्न नहीं हुई और पूरा अभियान बेहद शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो गया ।

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काशी रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास और आधुनिकीकरण के लिए लगभग 350 से 400 करोड़ रुपये का एक वृहद बजट स्वीकृत किया गया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत रेलवे स्टेशन परिसर और उसके आसपास की लगभग 47.26 एकड़ भूमि पर बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य प्रस्तावित हैं । इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य काशी स्टेशन को एक 'मल्टी-मॉडल हब' या इंटर-मॉडल स्टेशन के रूप में स्थापित करना है । इसके तैयार होने के बाद रेल, सड़क और जल परिवहन को एक ही परिसर से जोड़ दिया जाएगा, जिससे वाराणसी आने वाले तीर्थयात्रियों और स्थानीय नागरिकों को यात्रा के लिए विश्वस्तरीय सुविधाएं प्राप्त हो सकेंगी। 

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नमो घाट के ठीक ऊपर स्थित काशी रेलवे स्टेशन को अपग्रेड करने के लिए स्टेशन के दोनों प्रवेश द्वारों पर तीन-मंजिला भव्य इमारतों का निर्माण किया जा रहा है। इस अपग्रेडेशन के बाद राजघाट साइड में स्थित प्रवेश द्वार को स्टेशन का मुख्य प्रवेश द्वार बनाया जाएगा, जबकि वर्तमान प्रवेश द्वार को द्वितीय प्रवेश द्वार के रूप में उपयोग में लाया जाएगा। इसके अतिरिक्त यात्रियों की सुविधाओं के लिए नए टिकट घर, आधुनिक रिजर्वेशन काउंटर, विशाल पार्किंग क्षेत्र, वीआईपी प्रतीक्षालय और अत्याधुनिक टॉयलेट का निर्माण किया जाना है।

इस भव्य परियोजना के तहत स्टेशन के दोनों ओर के भवनों को जोड़ने के लिए लगभग 200 मीटर लंबा और 100 मीटर चौड़ा एक वातानुकूलित (एयर-कंडीशंड) एयर कॉनकर्स कॉरिडोर बनाया जा रहा है। यह कॉनकर्स न केवल यात्रियों के लिए पैदल पारपथ का कार्य करेगा, बल्कि इसमें यात्रियों के बैठने की विश्वस्तरीय सुविधाएं, शॉपिंग एरिया, फूड कोर्ट और मल्टीपर्पज स्टॉल भी विकसित किए जाएंगे। प्लेटफार्मों पर चढ़ने और उतरने के लिए लिफ्ट, आधुनिक एस्केलेटर और सीढ़ियों की व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा, भविष्य की आवश्यकताओं को देखते हुए काशी रेलवे स्टेशन के यार्ड रिमॉडलिंग की भी योजना है, जिसके अंतर्गत पटरियों और प्लेटफार्मों की संख्या बढ़ाई जाएगी।

इस पूरी कार्रवाई का मुख्य आधार भूमि का मालिकाना हक और न्यायालय का निर्णय रहा है । साल 2024 में रेलवे और स्थानीय राजस्व विभाग द्वारा की गई संयुक्त पैमाइश में यह खुलासा हुआ था कि उक्त मस्जिद और उससे जुड़े कब्रिस्तान की भूमि रेलवे के स्वामित्व वाली सीमा के भीतर आती है। इस भूमि पर अवैध अतिक्रमण को लेकर स्थानीय मस्जिद प्रबंधन और उत्तर रेलवे के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था  इसके बाद रेलवे प्रशासन द्वारा भूमि खाली करने के लिए कई बार नोटिस जारी किए गए । स्थानीय पक्षों द्वारा इस मामले को लेकर उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई थी । हालांकि, न्यायालय में चली लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद आखिरकार फैसला रेलवे के पक्ष में आया । हाईकोर्ट द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद, संयुक्त प्रशासनिक टीम ने नियमानुसार ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया ।

खबर का बैकग्राउंड:

यह मामला रेलवे और स्थानीय पक्षों के बीच लगभग 47.26 एकड़ भूमि के मालिकाना हक को लेकर था । साल 2024 में किए गए भूमि सर्वेक्षण में यह पाया गया कि मस्जिद और कब्रिस्तान का हिस्सा रेलवे के विस्तारीकरण प्रोजेक्ट की सीमा में आ रहा है । इसके बाद रेलवे ने भूमि खाली करने के लिए नोटिस दिए थे। इस मामले में मस्जिद कमेटी ने हाईकोर्ट में रिट याचिका भी दायर की थी, लेकिन अदालत से कानूनी राहत न मिलने और रेलवे के पक्ष में स्थिति स्पष्ट होने के बाद प्रशासन ने रात के समय भारी पुलिस बल की मौजूदगी में इस अवैध ढांचे को हटाने की कार्रवाई की। 

पब्लिक इम्पैक्ट:

इस बड़ी कार्रवाई के बाद काशी रेलवे स्टेशन और नमो घाट के आसपास के क्षेत्रों में यातायात और रेलवे के विकास कार्यों को नई गति मिलेग । भविष्य में बनने वाले विश्वस्तरीय 'मल्टी-मॉडल हब' से आम जनता को रेल, सड़क और जलमार्ग की एकीकृत सुविधाएं एक ही स्थान पर मिल सकेंगी । हालांकि, कार्रवाई के दौरान सुरक्षा कारणों से स्थानीय नागरिकों को अस्थायी रूप से आवाजाही में थोड़ी परेशानी का सामना करना पड़ा, लेकिन लंबी अवधि में यह परियोजना स्थानीय पर्यटन और आर्थिक विकास के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगी। 

UP Prime News एनालिसिस:

शहरी विकास और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के विस्तार के दौरान अक्सर कानूनी और संवेदनशील धार्मिक स्थलों के विवाद सामने आते हैं। इस मामले में न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों और प्रशासनिक दूरदर्शिता ने बिना किसी कानून-व्यवस्था की समस्या के विकास कार्य को आगे बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त किया है। 

वाराणसी | UP Prime News

Published: June 03, 2026 | 05:15 PM IST

By UP Prime News Desk










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