खाकी के पीछे ‘काला’ खेल: बर्खास्त सिपाही के 5 करोड़ के महल और 1.5 करोड़ की घड़ियों ने उड़ाए ED के होश
UP Prime News Exclusive Report)
लखनऊ/वाराणसी: उत्तर प्रदेश में कफ सिरप की तस्करी के जरिए चल रहे एक विशाल नशा सिंडिकेट पर UP Prime News आपके लिए सबसे बड़ी ग्राउंड रिपोर्ट लेकर आया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की लगातार 36 घंटे से चल रही छापेमारी ने एक बर्खास्त सिपाही और उसके सहयोगियों की काली कमाई के साम्राज्य को बेनकाब कर दिया है।
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| बर्खास्त सिपाही अलोक सिंह की कोठी:-up। prime news |
इस कार्रवाई में आलीशान बंगले, लग्जरी गाड़ियां और करोड़ों के फर्जी टर्नओवर के दस्तावेज मिले हैं, जिसे देखकर जांच एजेंसियां भी हैरान हैं।
1. सिपाही का 'राजमहल': 5 करोड़ सिर्फ ईंट-पत्थर का खर्च
इस पूरे स्कैंडल का मुख्य चेहरा बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह है। जांच में सामने आया है कि आलोक ने सिपाही की नौकरी की आड़ में कफ सिरप की तस्करी से अकूत संपत्ति जमा की।
UP Prime News को मिली जानकारी के मुताबिक, आलोक सिंह ने जो आलीशान घर बनवाया है, उसकी शुरुआती जांच में सिर्फ 'कंस्ट्रक्शन कॉस्ट' (निर्माण लागत) ही 5 करोड़ रुपये आंकी गई है। इसमें जमीन की कीमत शामिल नहीं है।
घर के अंदर का इंटीरियर इतना महंगा है कि बड़े-बड़े कारोबारियों के घर भी फीके पड़ जाएं। ED अब इस बात की जांच कर रही है कि एक सिपाही के पास इतना पैसा आखिर आया कहां से?
189 फर्जी कंपनियां और 450 करोड़ का 'कागजी' खेल
सिर्फ लखनऊ ही नहीं, बल्कि रांची, वाराणसी और सहारनपुर तक इस गिरोह के तार जुड़े हैं।
रांची में शुभम जायसवाल की फर्म 'शैली ट्रेडर्स' पर हुई छापेमारी में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ। वहां 189 फर्जी फर्मों के दस्तावेज मिले हैं।
जांच में पता चला कि कफ सिरप की तस्करी को छिपाने और काली कमाई को सफेद दिखाने के लिए 450 करोड़ रुपये का फर्जी टर्नओवर कागजों पर दिखाया गया था।
3. गुच्ची के बैग और राडो की घड़ियां: लग्जरी लाइफस्टाइल का नशा
तस्करी के पैसों से ये आरोपी कैसी रईसी जिंदगी जी रहे थे, इसका सबूत वाराणसी में शुभम जायसवाल के घर से मिला। ED की टीम ने वहां से तमाम लग्जरी सामान बरामद किए हैं:
ब्रांडेड बैग्स: 'प्रादा' (Prada) और 'गुच्ची' (Gucci) जैसे इंटरनेशनल ब्रांड्स के डिजाइनर बैग।
महंगी घड़ियां: 'राडो' (Rado) और 'ऑडेमर्स पिगुएट' (Audemars Piguet) जैसी हाई-एंड ब्रांड्स की घड़ियां, जिनकी कीमत 1.5 करोड़ रुपये से भी ज्यादा बताई जा रही है।
दवा कंपनी की आड़ में 'जहर' का कारोबार
UP Prime News की पड़ताल में मेसर्स 'आर्पिक फार्मास्यूटिकल्स प्राइवेट लिमिटेड' का नाम प्रमुखता से सामने आया है। आरोप है कि यह कंपनी कोडीन-बेस्ड (Codeine-based) कफ सिरप के गैर-कानूनी व्यापार और डायवर्जन में संलिप्त थी। कंपनी के ठिकानों पर हुई छापेमारी में करोड़ों के संदिग्ध लेन-देन के सबूत मिले हैं, जो आर्पिक फार्मा और उसकी सहयोगी कंपनी मेसर्स लाइफ साइंसेज के बीच हुए थे।
5. अब तक क्या हुआ? (एक नजर में)
गिरफ्तारी: 11 अक्टूबर को कृष्णानगर पुलिस ने इस रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए दीपक मानवानी, सूरज मिश्र और प्रीतम सिंह को गिरफ्तार किया था। हालांकि, एक साथी आरुष सक्सेना अभी भी फरार है।
रेड का दायरा: ED ने लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर, अहमदाबाद, जौनपुर, सहारनपुर और रांची समेत 25 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की है।
स्टेटस: जांच अब भी जारी है और ED जल्द ही संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया शुरू कर सकती है।
निष्कर्ष:
नशे के इस काले कारोबार ने यह साबित कर दिया है कि कैसे सिस्टम के अंदर बैठे लोग (जैसे बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह) कानून की धज्जियां उड़ाकर अपना साम्राज्य खड़ा कर लेते हैं। UP Prime News इस मामले की हर अपडेट आप तक सबसे पहले पहुंचाता रहेगा।

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