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नशीली खांसी की दवाओं पर हाईकोर्ट का कड़ा प्रहार! अब 'दवा' नहीं 'ड्रग्स' मानी जाएगी कोडीन युक्त सिरप, तस्करों की अब खैर नहीं

 प्रयागराज/उत्तर प्रदेश:

नशीली दवाओं के काले कारोबार पर नकेल कसते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक और बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर 'कोडीन' युक्त कफ सिरप का इस्तेमाल इलाज के बजाय नशे के लिए किया जा रहा है, तो आरोपियों पर न केवल ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, बल्कि कठोर NDPS एक्ट के तहत भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

Prayagraj high court 






UP Prime News की रिपोर्ट के मुताबिक, इस फैसले के बाद अब प्रदेश भर में कफ सिरप की तस्करी करने वाले गिरोहों और फर्जी लाइसेंस की आड़ में नशा बेचने वालों की गिरफ्तारी का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।
क्या है पूरा मामला?

इलाहाबाद हाईकोर्ट में वाराणसी के शुभम जायसवाल सहित लगभग 40 आरोपियों ने याचिका दायर कर अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर (FIR) को रद्द करने और गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग की थी। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि ये दवाएं लाइसेंस के तहत बेची जा रही हैं और इनमें कोडीन की मात्रा कम है, इसलिए इन पर NDPS एक्ट लागू नहीं होना चाहिए।
हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी: 'लाइसेंस का मतलब नशा बेचना नहीं'
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की खंडपीठ ने आरोपियों की सभी दलीलों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने दो टूक शब्दों में कहा। 
ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट बाजार में दवाओं के मानक बनाए रखने के लिए है।
NDPS एक्ट नशे के अवैध कारोबार को रोकने के लिए बनाया गया विशेष कानून है।
अगर दवा का इस्तेमाल नशे के लिए तस्करी (Smuggling) में हो रहा है, तो दोनों कानून एक साथ लागू हो सकते हैं।

UP Prime News की पड़ताल: झारखंड से यूपी-बिहार तक फैला था जाल

पुलिस और आबकारी विभाग की जांच में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। सोनभद्र, गाजियाबाद, वाराणसी, कानपुर और जौनपुर जैसे जिलों में लाखों की संख्या में पकड़ी गई कफ सिरप की बोतलें झारखंड के रांची से तस्करी कर लाई जा रही थीं।

तस्कर फर्जी बिलों और ई-वे बिलों का सहारा लेकर उत्तर प्रदेश, बिहार और त्रिपुरा जैसे राज्यों में नशीली दवाओं की सप्लाई कर रहे थे। हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद अब इन 40 से अधिक आरोपियों को लंबी जेल और भारी जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।

सावधानी से जांच के निर्देश

कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया है कि वे पूरी सावधानी और निष्पक्षता के साथ जांच जारी रखें। जो लोग लाइसेंस की आड़ में नशीली दवाओं की कालाबाजारी कर रहे हैं, उन्हें किसी भी कीमत पर बख्शा न जाए।

निष्कर्ष:

हाईकोर्ट के इस फैसले ने साफ कर दिया है कि कानून की नजर में नशे का सौदागर सिर्फ एक अपराधी है, चाहे वह दवा के नाम पर जहर ही क्यों न बेच रहा हो। UP Prime News समाज से अपील करता है कि नशीली दवाओं के खिलाफ इस अभियान में सजग रहें।

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