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कानपुर: नशेबाज पत्नी ने पति को कुल्हाड़ी से काटा, रची एक्सीडेंट की झूठी कहानी

 UP Prime News (कानपुर): उत्तर प्रदेश के कानपुर से एक रूह कंपा देने वाली वारदात सामने आई है। बिठूर थाना क्षेत्र के टिकरा गांव में आपसी विवाद के दौरान एक पत्नी ने हैवानियत की सारी हदें पार कर दीं। शराब के नशे में धुत महिला ने अपने ही पति पर कुल्हाड़ी से ताबड़तोड़ 26 वार कर उसे मौत के घाट उतार दिया। इस घटना के बाद महिला ने पुलिस को गुमराह करने के लिए मनगढ़ंत कहानी भी रची, लेकिन फॉरेंसिक जांच ने उसकी पोल खोल दी।

बिठूर फोटो :-up prime news






विवाद और वारदात की पूरी कहानी

मृतक की पहचान 45 वर्षीय रविशंकर सविता उर्फ पप्पू के रूप में हुई है, जो टाइल्स लगाने का काम करता था। जानकारी के अनुसार, रविशंकर की शादी 2019 में बांदा की रहने वाली वीरांगना से हुई थी। बुधवार रात करीब 12 बजे दोनों के बीच नशे की हालत में जमकर झगड़ा हुआ। विवाद इतना बढ़ा कि वीरांगना ने कुल्हाड़ी उठा ली और रविशंकर के सिर, चेहरे और गर्दन पर हमला कर दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर जख्मों के 26 निशान मिले हैं।

साजिश का ऐसे हुआ पर्दाफाश

हत्या के बाद आरोपी पत्नी ने शातिर तरीके से खून साफ किया और शोर मचाया कि पति का एक्सीडेंट हो गया है। हालांकि, मौके पर पहुंची पुलिस और फॉरेंसिक टीम को सीढ़ियों पर खून के धब्बे और कमरे में खून से सना 'सिलबट्टा' व टूटा हुआ 'बेलन' मिला। पुलिस की सख्ती के बाद महिला का झूठ टिक नहीं सका। पुलिस ने आरोपी वीरांगना को पोस्टमार्टम हाउस के बाहर से ही हिरासत में ले लिया।

मासूम बच्चे की आंखों के सामने हुआ कत्ल

इस खौफनाक मंजर का सबसे दुखद पहलू यह है कि वारदात के वक्त दंपत्ति का 4 साल का बेटा घर में ही मौजूद था। अपने पिता को लहूलुहान देख मासूम इतना डर गया कि वह कमरे के कोने में छिप गया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर बच्चे को सांत्वना दी।

जनता पर प्रभाव (Public Impact)

इस घटना ने स्थानीय समाज को झकझोर कर रख दिया है। नशे की लत के कारण एक हंसता-खेलता परिवार तबाह हो गया। लोग अब अपने आस-पड़ोस में होने वाले घरेलू विवादों और नशे की आदतों के प्रति अधिक सतर्क और चिंतित नजर आ रहे हैं।

UP Prime News विश्लेषण:

यह घटना समाज में गहराई तक पैठ बना चुकी नशे की समस्या और उसके कारण होने वाली घरेलू हिंसा का जीता-जागता प्रमाण है। जब नशा विवेक पर हावी हो जाता है, तो पवित्र रिश्ते भी खून से सन जाते हैं। ऐसे मामलों में केवल कानूनी कार्रवाई ही काफी नहीं है, बल्कि सामाजिक स्तर पर नशा मुक्ति अभियानों की भी सख्त जरूरत है।

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