Breaking News

योगी आदित्यनाथ के सम्मान में इस्तीफा देने वाले GST अफसर विवादों में, भाई ने लगाया नौकरी में फर्जीवाड़े का गंभीर आरोप

लखनऊ  उत्तर प्रदेश 

अयोध्या में तैनात रहे जीएसटी (GST) विभाग के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह, जिन्होंने हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सम्मान में इस्तीफा देकर सुर्खियां बटोरी थीं, अब गंभीर विवादों में घिर गए हैं। उनके सगे भाई डॉ. विश्वजीत सिंह ने उन पर फर्जी तरीके से नौकरी हासिल करने का आरोप लगाया है। डॉ. विश्वजीत का दावा है कि प्रशांत सिंह ने फर्जी 'दिव्यांग प्रमाण पत्र' (Disability Certificate) के सहारे यह सरकारी पद प्राप्त किया था और अब जांच से बचने के लिए इस्तीफे का नाटक कर रहे हैं।

जीएसटी अफसर प्रशांत सिंह के इस्तीफे पर भाई का आरोप
जीएसटी (GST) विभाग के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह








प्रशांत कुमार सिंह ने पिछले मंगलवार को यह कहते हुए अपना इस्तीफा सौंपा था कि वे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा सीएम योगी पर की गई 'औरंगजेब' वाली टिप्पणी से आहत हैं। उन्होंने कहा था कि वे उस प्रदेश का नमक खाते हैं जिसके मुखिया का अपमान वे बर्दाश्त नहीं कर सकते। हालांकि, उनके भाई का कहना है कि यह सब एक सोची-समझी चाल है ताकि वे जेल जाने से बच सकें और अब तक ली गई सैलरी की रिकवरी न हो।

मऊ के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. संजय कुमार गुप्ता ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि प्रशांत सिंह के खिलाफ फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र की शिकायत पर जांच शुरू कर दी गई है। विभाग ने उन्हें सितंबर और अक्टूबर 2021 में मेडिकल बोर्ड के सामने पेश होने के लिए दो बार नोटिस जारी किया था, लेकिन वे उपस्थित नहीं हुए। भाई का आरोप है कि जिस आंख की बीमारी के आधार पर सर्टिफिकेट बनवाया गया, वह विज्ञान के अनुसार 50 साल से कम उम्र के व्यक्ति को होना लगभग असंभव है।

खबर का बैकग्राउंड:

यह विवाद 2021 से चल रहा है जब प्रशांत सिंह के भाई ने ही उनके खिलाफ फर्जीवाड़े की शिकायत दर्ज कराई थी। आजमगढ़ मंडलीय मेडिकल बोर्ड ने उन्हें जांच के लिए बुलाया था, लेकिन वे टालमटोल करते रहे। हालिया इस्तीफा उसी पुरानी जांच से ध्यान भटकाने की कोशिश माना जा रहा है।

पब्लिक इम्पैक्ट:

इस खबर का सीधा असर सरकारी व्यवस्था और आरक्षण प्रणाली पर पड़ता है। यदि कोई अधिकारी फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी पाता है, तो यह योग्य और जरूरतमंद उम्मीदवारों के हक का हनन है। ऐसे मामलों से जनता के बीच प्रशासन की छवि और पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं।

UP Prime News एनालिसिस:

यह मामला व्यक्तिगत विवाद से अधिक प्रशासनिक शुचिता का है। लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच जरूरी है ताकि सच सामने आ सके और व्यवस्था की विश्वसनीयता बनी रहे।

लखनऊ  UP Prime News

Published: January 28, 2026 | 11:26 AM IST

By UP Prime News Desk




कोई टिप्पणी नहीं