उत्तर प्रदेश (गोरखपुर):
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले से एक हृदय विदारक चिकित्सा लापरवाही का मामला सामने आया है। यहां के सिकरीगंज स्थित 'न्यू राजेश हाईटेक हॉस्पिटल' में मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराने के बाद कई मरीजों की आंखों में भयानक संक्रमण (Infection) फैल गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस संक्रमण की गंभीरता इतनी अधिक थी कि अब तक चार मरीजों की आंखों की रोशनी बचाने के प्रयास विफल रहे और डॉक्टरों को संक्रमण को दिमाग तक फैलने से रोकने के लिए उनकी आंखें शरीर से अलग करनी पड़ीं।
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| गोरखपुर मोतियाबिंद सर्जरी लापरवाही मामला सांकेतिक फोटो : up prime news |
अस्पताल में 1 और 2 फरवरी को कुल 42 मरीजों का मोतियाबिंद का ऑपरेशन किया गया था। ऑपरेशन के कुछ ही समय बाद मरीजों ने आंखों में तेज दर्द, मवाद (Pus) आने और खून निकलने की शिकायत की। धीरे-धीरे संक्रमण इस कदर बढ़ा कि मरीजों को तत्काल दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) रेफर करना पड़ा। अब तक कुल 22 मरीज इलाज के लिए दिल्ली एम्स पहुंच चुके हैं, जिनमें से 6 मरीजों की आंखों की रोशनी पूरी तरह जा चुकी है।
पीड़ितों में बारी गांव की 60 वर्षीय देवराजी, 82 वर्षीय अर्जुन सिंह और 80 वर्षीय रामदरश जैसे बुजुर्ग शामिल हैं, जिनकी आंखों को संक्रमण के कारण सर्जरी कर निकालना पड़ा। परिजनों का कहना है कि ऑपरेशन के बाद जब दिक्कत शुरू हुई, तो स्थानीय स्तर पर राहत नहीं मिली, जिसके बाद उन्हें दिल्ली भागना पड़ा। दिल्ली एम्स के डॉक्टरों ने बताया कि यदि समय रहते संक्रमित आंख को नहीं निकाला जाता, तो यह संक्रमण मरीज के मस्तिष्क तक पहुंच सकता था, जो जानलेवा साबित होता। बेलघाट की 60 वर्षीय बहाउद्दीन की बेटी ने भी बताया कि उनकी मां की आंखों की रोशनी अब पूरी तरह खत्म हो गई है।
इस पूरे मामले पर प्रशासनिक कार्रवाई शुरू हो गई है। जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. ए.के. चौधरी ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग पूरी स्थिति पर करीब से नजर रख रहा है। अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर (OT) को तुरंत प्रभाव से सील कर दिया गया है। संक्रमण के कारणों का पता लगाने के लिए बीआरडी मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायोलॉजी टीम ने सोमवार को अस्पताल का दौरा किया और वहां से 10 से अधिक नमूने (Samples) एकत्र किए। माइक्रोबायोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. अमरेश सिंह के अनुसार, जांच रिपोर्ट आने के बाद ही संक्रमण के वास्तविक कारण और बैक्टीरिया के प्रकार का पता चल सकेगा।
दूसरी ओर, अस्पताल के संचालक राजेश राय का कहना है कि उनका अस्पताल पिछले कई वर्षों से मोतियाबिंद की सर्जरी कर रहा है और ऐसी घटना पहली बार हुई है। उन्होंने बताया कि फिलहाल सभी मरीजों का उपचार कराया जा रहा है और वे भी जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि, इतनी बड़ी संख्या में मरीजों की आंखों की रोशनी जाना सीधे तौर पर ऑपरेशन थिएटर की स्वच्छता और चिकित्सा मानकों की अनदेखी की ओर इशारा करता है।
खबर का बैकग्राउंड:
उत्तर प्रदेश के ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में निजी अस्पतालों द्वारा मोतियाबिंद के कैंप या नियमित सर्जरी की जाती है। 'न्यू राजेश हाईटेक हॉस्पिटल' में फरवरी के पहले सप्ताह में हुए इन ऑपरेशनों में स्वच्छता के मानकों (Sterilization) में कमी होने की आशंका जताई जा रही है। मोतियाबिंद सर्जरी के बाद 'एंडोफ्थाल्मिटिस' जैसा गंभीर संक्रमण होने का खतरा तब बढ़ जाता है जब सर्जिकल उपकरणों या ओटी के वातावरण में बैक्टीरिया मौजूद हों।
पब्लिक इम्पैक्ट:
इस घटना के बाद आम जनता में निजी स्वास्थ्य केंद्रों और मोतियाबिंद के ऑपरेशनों को लेकर भारी डर और अविश्वास का माहौल है। विशेष रूप से बुजुर्गों और ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के लिए यह एक चेतावनी है कि वे सर्जरी के लिए अस्पताल का चयन करते समय उसकी विश्वसनीयता और स्वच्छता मानकों की जांच जरूर करें। साथ ही, यह सरकारी तंत्र की निगरानी पर भी सवाल खड़े करता है कि क्या निजी अस्पतालों के ऑपरेशन थिएटरों की नियमित जांच हो रही है या नहीं।
UP Prime News एनालिसिस:
यह घटना स्वास्थ्य प्रणाली में जवाबदेही की भारी कमी को दर्शाती है। चिकित्सा मानकों में जरा सी भी लापरवाही किसी व्यक्ति को जीवन भर के लिए अंधकार में धकेल सकती है, जिसकी भरपाई किसी भी कानूनी कार्रवाई से संभव नहीं है।
गोरखपुर | UP Prime News
Published: February 12, 2026 | 10:05 AM IST
By UP Prime News Desk
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