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लखनऊ: नीट की पढ़ाई के दबाव में बेटे ने की पिता की हत्या, शव के टुकड़े कर ड्रम में छिपाया; रोंगटे खड़े कर देने वाली वारदात

 लखनऊ (उत्तर प्रदेश):

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के पॉश इलाके आशियाना से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने रिश्तों की मर्यादा और मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। यहाँ एक 21 वर्षीय युवक ने अपने सगे पिता की सिर्फ इसलिए गोली मारकर हत्या कर दी, क्योंकि पिता उस पर डॉक्टर बनने के लिए नीट (NEET) की परीक्षा पास करने का दबाव बना रहे थे। इतना ही नहीं, आरोपी बेटे ने साक्ष्य छिपाने के लिए अपने पिता के शव के कई टुकड़े किए और उन्हें अलग-अलग स्थानों पर फेंकने के साथ-साथ घर के भीतर ही एक ड्रम में छिपा दिया।

लखनऊ हत्याकांड के बाद बिलखते हुए परिजन और रिश्तेदार
लखनऊ हत्याकांड के बाद बिलखते हुए परिजन और रिश्तेदार फोटो :UP prime news







पुलिस के अनुसार, यह घटना आशियाना के सेक्टर एल-91 की है। मृतक की पहचान 49 वर्षीय मानवेन्द्र सिंह के रूप में हुई है, जो शराब के कारोबारी थे और साथ ही बुद्धेश्वर इलाके में एक पैथोलॉजी भी चलाते थे। आरोपी बेटा अक्षत प्रताप सिंह, जो टीएस मिश्रा कॉलेज से बीबीए (BBA) की पढ़ाई कर रहा था, अपने पिता द्वारा बार-बार मेडिकल की तैयारी करने के दबाव से परेशान था। 20 फरवरी की सुबह करीब 4:30 बजे इसी मुद्दे को लेकर पिता-पुत्र के बीच तीखी बहस हुई, जिसके बाद आवेश में आकर अक्षत ने पिता की लाइसेंसी राइफल से उन्हें गोली मार दी। गोली लगने से मानवेन्द्र सिंह की मौके पर ही मौत हो गई।

फोटो : UP prime news







वारदात के समय मानवेन्द्र सिंह की छोटी बेटी कृति, जो 11वीं की छात्रा है, अपने कमरे में सो रही थी। गोली चलने की आवाज सुनकर जब वह दौड़कर अपने भाई के पास पहुंची, तो वहां का नजारा देखकर उसके होश उड़ गए। फर्श पर पिता का खून से लथपथ शव पड़ा था। अक्षत ने अपनी बहन को डराया-धमकाया और जान से मारने की धमकी देकर चुप करा दिया। इसके बाद उसने अपनी बहन को चार दिनों तक घर के अंदर ही कैद करके रखा, ताकि वह किसी को कुछ बता न सके।

पुलिस की गिरफ्त में पिता का हत्यारा आरोपी अक्षत प्रताप सिंह
पुलिस की गिरफ्त में पिता का हत्यारा आरोपी अक्षत प्रताप सिंह फोटो : UP prime news








शव को ठिकाने लगाने के लिए अक्षत ने बेहद खौफनाक योजना बनाई। शुरुआत में उसने शव को कार में लादकर गोमती नदी में फेंकने की कोशिश की, लेकिन शव का वजन अधिक होने के कारण वह अकेले ऐसा नहीं कर पाया। हार मानकर उसने बाजार से एक आरी खरीदी और घर के भीतर ही पिता के शव को कई हिस्सों में काट दिया। उसने हाथ और पैर के हिस्सों को काटकर पारा इलाके के सदराौना में फेंक दिया, जबकि सिर और धड़ को एक नए खरीदे गए नीले रंग के ड्रम में भरकर उसमें सीमेंट डाल दिया, ताकि बदबू न फैले।

आशियाना स्थित मानवेन्द्र सिंह के घर पर जांच करती लखनऊ पुलिस
आशियाना स्थित मानवेन्द्र सिंह के घर पर जांच करती लखनऊ पुलिस फोटो : UP prime news








इस दौरान अक्षत लगातार पड़ोसियों और रिश्तेदारों को गुमराह करता रहा। उसने पड़ोसियों से कहा कि उसके पिता 19 फरवरी को काम के सिलसिले में दिल्ली गए थे और वापस नहीं लौटे। शक से बचने के लिए उसने खुद ही 20 फरवरी को थाने जाकर पिता की गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज कराई। हालांकि, पड़ोसियों को अक्षत के व्यवहार पर संदेह हुआ। जब मानवेन्द्र कई दिनों तक नहीं दिखे, तो पड़ोसियों ने अपने घरों के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। फुटेज में मानवेन्द्र सिंह 19 फरवरी की रात 12 बजे कार से घर के भीतर जाते तो दिखे, लेकिन बाहर निकलते हुए कहीं नजर नहीं आए।

सीसीटीवी फुटेज देखने के बाद पड़ोसियों का शक गहरा गया और उन्होंने पुलिस को सूचित किया। पुलिस ने जब अक्षत को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की, तो उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर घर के भीतर रखे नीले ड्रम से शव का धड़ और सिर बरामद किया। इसके साथ ही हत्या में इस्तेमाल की गई आरी, लाइसेंसी राइफल और कार को भी कब्जे में ले लिया गया है। फॉरेंसिक टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाए हैं और शव के अंगों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है।

खबर का बैकग्राउंड:

मानवेन्द्र सिंह के परिवार का इतिहास दुखों से भरा रहा है। उनकी पत्नी का निधन साल 2017 में ही हो गया था, जिसके बाद वह अपने दोनों बच्चों अक्षत और कृति की परवरिश कर रहे थे। मानवेन्द्र के पिता सुरेंद्र पाल सिंह जालौन में रहते हैं और उत्तर प्रदेश पुलिस से सेवानिवृत्त दरोगा हैं। मानवेन्द्र चाहते थे कि उनका बेटा डॉक्टर बने, लेकिन बेटे की रुचि बीबीए में थी। यही वैचारिक मतभेद अंततः एक जघन्य अपराध का कारण बन गया।

पब्लिक इम्पैक्ट:

इस घटना ने समाज में माता-पिता और बच्चों के बीच बढ़ते संवादहीनता और करियर के दबाव को लेकर एक गंभीर बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों पर उनकी इच्छा के विरुद्ध करियर थोपना और अत्यधिक दबाव बनाना उनके मानसिक स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है। साथ ही, समाज में बढ़ती हिंसात्मक प्रवृत्ति और पारिवारिक मूल्यों के पतन पर भी यह घटना एक गंभीर चेतावनी है। आम जनता में इस क्रूरता को लेकर भारी आक्रोश और भय व्याप्त है।

UP Prime News एनालिसिस:

यह मामला केवल एक हत्या का नहीं, बल्कि सामाजिक ताने-बाने के टूटने का प्रतीक है। कानून की दृष्टि से आरोपी को कड़ी सजा मिलना तय है, लेकिन समाज को यह सोचने की जरूरत है कि एक छात्र अपराधी कैसे बन गया। करियर का दबाव और लाइसेंसी हथियारों तक आसान पहुंच ने इस त्रासदी को और भयावह बना दिया है।

लखनऊ | UP Prime News

Published: Feb 24, 2026 | 11:13 AM IST

By UP Prime News Desk








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