स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का लखनऊ में 'गौ प्रतिष्ठा धर्म-युद्ध' शुरू, प्रशासन की 26 कड़ी शर्तों के बीच गाय को 'राष्ट्र माता' बनाने की मांग तेज
लखनऊ (उत्तर प्रदेश):
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आज धार्मिक और प्रशासनिक हलचल तेज है। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने लखनऊ के कांशीराम प्रेरणा स्थल से 'गौ प्रतिष्ठा धर्म-युद्ध' का आधिकारिक शंखनाद कर दिया है। इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य भारत में गाय को 'राष्ट्र माता' का दर्जा दिलाना और गौ हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग को मजबूती से उठाना है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इस कार्यक्रम के माध्यम से केंद्र और राज्य सरकार को गौ रक्षा के मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करने की चुनौती दी है।
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| स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद फोटो : UP prime news |
कार्यक्रम की शुरुआत 'विजय मुहूर्त' में गौमय गणेश की पूजा और 'गौ प्रतिष्ठा ध्वज' की स्थापना के साथ की गई। स्वामी जी ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी राजनीति के लिए नहीं, बल्कि सनातनी आस्था और गौ माता के सम्मान की रक्षा के लिए है। उन्होंने देश भर के सनातनी हिंदुओं से इस आंदोलन में जुड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि जो लोग लखनऊ नहीं पहुंच पाए हैं, वे अपने घरों में रहकर ही इस मुहिम का समर्थन करें। दोपहर ढाई बजे समर्थकों से शंखनाद करने की विशेष अपील की गई थी, ताकि गौ रक्षा की गूंज पूरे देश में सुनाई दे सके।
प्रशासन ने इस आयोजन को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। लखनऊ जिला प्रशासन ने शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए आयोजकों के सामने 26 बेहद सख्त शर्तें रखी हैं। इन शर्तों में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि किसी भी धर्म, जाति या भाषा के खिलाफ भड़काऊ भाषण देना पूरी तरह प्रतिबंधित होगा। इसके साथ ही, बिना पूर्व अनुमति के किसी भी प्रकार के जुलूस या शोभा यात्रा निकालने की मनाही है। कार्यक्रम स्थल पर ध्वनि विस्तारक यंत्रों (लाउडस्पीकर) के उपयोग के लिए भी सुप्रीम कोर्ट के नियमों का पालन करना अनिवार्य है, जिसके तहत रात 10 बजे तक ही इनका उपयोग हो सकेगा और ध्वनि स्तर 75 डेसीबल से अधिक नहीं रखा जा सकता।
प्रशासन ने सुरक्षा की जिम्मेदारी आयोजकों पर ही डाली है और स्पष्ट किया है कि कार्यक्रम के दौरान तैनात पुलिस बल का खर्च भी आयोजकों को ही वहन करना होगा। किसी भी शर्त का उल्लंघन होने पर अनुमति तत्काल रद्द करने की चेतावनी दी गई है। साथ ही, पंडाल में सिंथेटिक सामग्री के उपयोग पर रोक और पार्किंग व्यवस्था को लेकर भी कड़े निर्देश दिए गए हैं। आयोजन स्थल के आसपास भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।
यह आंदोलन ऐसे समय में हो रहा है जब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद स्वयं कुछ विवादों और कानूनी प्रक्रियाओं का सामना कर रहे हैं। हाल ही में रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष महाराज ने उन पर यौन शोषण और जानलेवा हमले जैसे गंभीर आरोप लगाते हुए प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई है। हालांकि, माननीय उच्च न्यायालय ने फिलहाल स्वामी जी की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है, जिससे उन्हें बड़ी राहत मिली है। स्वामी जी ने इन आरोपों के बीच भी अपने संकल्प को दोहराते हुए कहा कि जो 'असली हिंदू' होगा, वह इस आंदोलन से अवश्य जुड़ेगा।
खबर का बैकग्राउंड:
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद लंबे समय से गाय को राष्ट्र माता का दर्जा दिलाने की मांग कर रहे हैं। उनका तर्क है कि भारतीय संस्कृति में गाय का स्थान सर्वोच्च है और इसे केवल एक पशु के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इससे पहले भी वे विभिन्न मंचों से गौ रक्षा को लेकर कड़े बयान दे चुके हैं और सरकार पर इस मुद्दे को लेकर दबाव बनाने का प्रयास करते रहे हैं।
पब्लिक इम्पैक्ट:
लखनऊ के मुख्य स्थलों पर हो रहे इस बड़े आयोजन और पुलिस की पाबंदियों के कारण यातायात व्यवस्था पर असर पड़ सकता है। धार्मिक भावनाओं से जुड़ा मुद्दा होने के कारण आम जनता में इसे लेकर काफी उत्सुकता और चर्चा है। वहीं, प्रशासन की सख्ती यह सुनिश्चित करने के लिए है कि आम नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो और सांप्रदायिक सौहार्द बना रहे।
UP Prime News एनालिसिस:
यह आयोजन धार्मिक आस्था और प्रशासनिक व्यवस्था के बीच एक संतुलन की परीक्षा है। जहां एक ओर गौ रक्षा का मुद्दा भावनाओं से प्रेरित है, वहीं दूसरी ओर प्रशासन की शर्तें कानून के शासन को बनाए रखने की कोशिश हैं। स्वामी जी पर लगे कानूनी आरोपों के बीच इस आंदोलन की सफलता उनकी सार्वजनिक छवि और अनुयायियों के समर्थन पर निर्भर करेगी।
लखनऊ | UP Prime News
Published: March 11, 2026 | 10:04 AM IST
By UP Prime News Desk

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